सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कोरा ज्ञान ....एक emotional motivational कहानी

Story in hindi


Hi दोस्तों आप हैं। प्रेणादायी chakhdey गौरव के साथ दोस्तों ज्यादतर हम लोग ऐसी शिक्षा प्राप्त करते हैं।जो सिर्फ किताबों तक सिमित होती है। एक तरह से पंगु बना देती है।हम आज इस टॉपिक पर विस्तार से बात करें।उससे पहले एक कहानी इस टॉपिक को खूबसूरत तरीके से बयाँ करती है।
        एक बहुत बड़े पंडितजी रहते हैं।जिनकी ख्याति दूर- दूर तक फैली होती है।उनके प्रवचन सुनने के लिए लोग दूर -दूर से आते हैं।पंडितजी को इस बात का बड़ा घमण्ड रहता है।वो हमेशा अपनी तारीफ सुन्ना पसंद करते हैं ।एक बार सावन के महीने मे एक गांव मे भगवत कथा करनी होती है।पंडितजी के गांव और उस गांव के बीच एक बड़ी नदी बहती है ।जिसे नाव के द्वारा पर करना पड़ता है।पंडितजी शाम के समय नदी किनारे पहुचते है।वहां पर नाव चलने वाले मल्लाह को बुलाकर कहते हैं कि मुझे जल्दी नदी पर कर दो बहुत जरूरी काम है। मल्लाह हाथ जोड़कर बोलता है पंडितजी कुछ लोग और आजाएं तो मुझे थोड़ा फायदा हो जायेगा।पंडितजी गुस्से से लाल आंख करते हुए बोलते है मुर्ख तू जनता है मैं कौन हूँ।मेरा थोड़ा सा समय भी बहुत कीमती है।तू मुझ अकेले को नदी पर करायेगा तो मे तुझे किराया तो दूँगा ही साथ मे बहुत सारा घ्यान भी दूँगा जिससे तेरा उद्धार होगा।मल्लाह ने हाथ जोडकर कहा पंडितजी पश्चिम मे घनघोर घटायें उठ आयी हैं।शाम भी हो गयी है ऐसे मे नदी मे नाव डालना उचित नही होगा।यह सुनकर पंडितजी बहुत भड़क जाते है।बहुत गुस्से से बोलते हैं कि अब एक मुर्ख मल्लाह मुझे सिखायेगा चुपचाप मुझे नदी पर करा दो नही तो तुम्हारी खेर नही।विचारा मल्लाह नदी मे नाव डाल देता है।पंडितजी बड़े अभिमान से नाव पर बैठ जाते हैं।कुछ देर बाद मल्लाह से पूछते हैं तुम्हारा नाम क्या है।मल्लाह-जी भोला नाम है ।पंडितजी फिर चुप हो जाते हैं कुछ देर बाद पंडितजी- भोला तुमने कितनी शिक्षा प्राप्त की है।मल्लाह-पंडितजी मैंने तो शाला का मुंह तक नही देखा।पंडितजी-मुर्ख तुम्हारा एक तिहाई जीवन बर्बाद हो गया।फिर पंडित जी- "  शिक्षा प्राप्त नही की तो कोई बात नही पर मेरे जैसे विद्वान् के प्रवचन तो सुने ही होंगे न।' मल्लाह  -"नही पंडितजी सारा समय तो इस नदी की गोद मे ही गुजरता है ।मेरा सौभाग्य ही कहाँ जो आप जैसे विद्वान् के बचनों को सुन सकूँ"।पंडितजी -- "मुर्ख तेरे जीवन का एक तिहाई जीवन और बर्वाद हो गया"।
                इस समय नाव बीच नदी में आ गयी चारों तरफ घनघोर बदल छा गए ।मल्लाह बोलता है ऐसा लगता है कि बहुत भारी बर्षा होने वाली है। सच मे बादल तेजी से गरजता है और चारों तरफ अँधेरा छा जाता है।बहुत तेज हवाओं के साथ भारी बर्षा शुरू हो जाती है।नाव मे पानी भरने लगता है। मल्लाह --"लगता है आज  नदी हमे अपनी गोद मे समा लेगी पंडितजी आप को तैरना तो आता ही होगा"। यह सुनकर पंडितजी बहुत घबरा कर बोलते हैं नही भईया मुझे बिल्कुल भी तैरना नही आता। मलल्लाह बोलता है--"पंडितजी आपका तो सारा जीवन बर्वाद हो गया"।इतने मे नाव नदी म दुब जाती है।मल्लाह और पंडितजी दोनों नदी म गिरते हैं।मल्लाह के लिए नदी म तैरना कोई बड़ी बात भी रहती।लेकिन पंडितजी की हालत खराब हीने लगती है।मुह मे पानी भर जाता है।लेकिन मल्लाह जैसे तैसे पंडितजी को किनारे पर पंहुचा देता है।किनारे पर पहुँचकर मल्लाह --"पंडितजी ऐसा कोरा घज्ञान किस काम का जो समय आने पर साथ न दे सके।पंडितजी को आज सबसे बड़ी सीख मिली थी।जिसे वो चुपचाप सुनते रहते हैं।

ये पॉपुलर कहानियाँ भी पढ़े

1. सोच
2.कोरा ज्ञान
3.पाँच बातें

story in hindi.
         story in hindi...कोरा ज्ञान पसंद  आई हो । तो शेयर जरूर करे । यदि आपके पास भी ऐसी hindi story with moral , motivational आर्टिकल हो तो हमें inhindistory@gmail.com पर भेजे हम आपके नाम और फोटो के साथ publish करेंगे। धन्यवाद !






   
       








इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक बार फिर कछुआ और खरगोश रेस....motivational story

vivekanand story in hindi
Hi दोस्तों एक बार फिर स्वागत आप सभी का in hindi motivational story chakhdey पर और आप सब है मेरे साथ अर्थात गौरव के साथ तो शुरू करते है कहानी....
           आप सभी ने खरगोश और कछुए की कहानी तो पड़ी ही होगी की कछुआ और खरगोश की दौड़ होती है।खरगोश बहुत तेज दौड़ता है।फिर एक पेड़ के नीचे आराम करने लगता है और उसकी नींद लग जाती है।और कछुआ दौड़ जीत लेता है। अब दोसरी स्टोरी-       जब कछुआ रेस जीत जाता है।तब खरगोश को अपनी गलती का एहसास होता है।वह शेर के पास जाता हैऔर फिर से रेस करने की प्राथना करता है।शेर कछुए को बुलाकर पूछता है कि कछुआ तुम से एक बार फिर रेस करना चाहता है।क्या तुम तैयार हो चूँकि कछुआ रेस जीता था।इसलिए थोड़ा सा ईगो भी आ गया।शेर की बात सुनकर हँसकर बोलता है कि ख़रगोश भाई को फिर से हारने का शौक है तो वह तैयार है। दूसरे दिन सभी जानवर रेस देखने के लिए तय स्थान पर पहुँच जाते है।हरी झंडी दिखाई जाती है और रेस शुरू होती है।इस बार खरगोश पहली वाली गलती नही दोहराता है।तेजी से दौड़ कर बहुत बड़े अंतर से रेस जीत लेता है। तीसरी स्टोरी--          जब खरगोश जीत जाता है।तो कछुआ को ब…

vivekanand story in hindi dhyan ki shakti

vivekanand story in hindi
    दोस्तों आज मैं आपके साथ स्वामी विवेकानंद जी की जीवन की एक और प्रेणादायी कहानी vivekanand story in hindiशेयर कर रहा हूँ

    बात शिकागो की है एक बार विवेकानंद अपने अनुनायियों के साथ टहलते हुए एक नदी के किनारे पर पहुँचे वहाँ पर देखते हैं कि कुछ लोग नदी मे बहने वाले अंडे के छिलकों पर बंदूक से निशाना लगा रहे हैं पर बहते हुए अंडो के छिलके पर किसी से भी निशाना नही लग रहा स्वामी जी ने कुछ देर यह सब देखा पर किसी से भी नदी मे बहते हुए अंडे के छिलकों पर निशाना नही लगा सब काफी मेहनत कर रहे थे स्वामी विवेकानंद अपने अनुनायियों के साथ उन बन्दों के पास गए जो निशाना लगा रहे थे और बोले की वह भी निशाना लगाना चाहते हैं जो निशाना लगा रहे थे उन्होंने आश्चर्य से स्वामी विवेकानंद को देखा क्योंकि वो एक सन्यासी के भेष मे थे और स्वामी विवेकानंद से पूछा की उन्होंने पहले कभीं निशाना लगया है तो स्वामी जी ने मुस्कुराकर जबाब दिया की के उन्होंने पहले कभी भी बन्दूक तक नही चलायी पर आज निशाना लगाना चाहते हैं जो निशाना लगा रहे थे उन्होंने स्वामीजी को अपनी बन्दूक दे दी विवेकानन्दजी ने ध्यान …