सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पोस्ट

दिसंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

vivekanand story in hindi dhyan ki shakti

vivekanand story in hindi     दोस्तों आज मैं आपके साथ स्वामी विवेकानंद जी की जीवन की एक और प्रेणादायी कहानी  vivekanand story in hindi   शेयर कर रहा हूँ           बात शिकागो की है एक बार विवेकानंद अपने अनुनायियों के साथ टहलते हुए एक नदी के किनारे पर पहुँचे वहाँ पर देखते हैं कि कुछ लोग नदी मे बहने वाले अंडे के छिलकों पर बंदूक से निशाना लगा रहे हैं पर बहते हुए अंडो के छिलके पर किसी से भी निशाना नही लग रहा स्वामी जी ने कुछ देर यह सब देखा पर किसी से भी नदी मे बहते हुए अंडे के छिलकों पर निशाना नही लगा सब काफी मेहनत कर रहे थे स्वामी विवेकानंद अपने अनुनायियों के साथ उन बन्दों के पास गए जो निशाना लगा रहे थे और बोले की वह भी निशाना लगाना चाहते हैं जो निशाना लगा रहे थे उन्होंने आश्चर्य से स्वामी विवेकानंद को देखा क्योंकि वो एक सन्यासी के भेष मे थे और स्वामी विवेकानंद से पूछा की उन्होंने पहले कभीं निशाना लगया है तो स्वामी जी ने मुस्कुराकर जबाब दिया की के उन्होंने पहले कभी भी बन्दूक तक नही चलायी पर आज निशाना लगाना चाहते हैं जो निशाना लगा रहे थे उन्होंने स्वामीजी को अपनी बन्दूक दे दी विवेक

Swami vivekanand 1- motivational story in hindi

Swami vivekanand 1-  motivational story in hindi  दोस्तों आप हो hindi motivational story website inhindistory.com पर आप सभी स्वामी विवेकानंद के बारे में जानते ही हो हमारे देश के अग्रणी महापुरुषों मे स्वामी जी का नाम आता है उनके शिकागो मे दिए भाषण को हमेशा याद की जायेगा स्वामी विवेकानन्द युवा के रोल मॉडल है और मेरे भी मैं inhindistory पर उनके जीवन की सभी रोचक कहानियां पोस्ट की जाएंगी आज कृपया सभी पोस्ट पढ़े आज स्वामी विवेकानन्द के जीवन की बहुत ही मोटिवेशनल स्टोरी      Swami vivekanand 1-  motivational story in hindi   share कर रहा हूँ                            भागो मत एक बार स्वामी विवेकानन्द एक मंदिर मे पूजा करने के लिए जाते हैं पूजा कर के मंदिर से लौटने लगते हैं तो कुछ बन्दर उन्हें घेर लेते हैं स्वामी विवेकानंद आगे की और बढ़ने लगते है तो बन्दर भी उन पीछे दौड़ने लगते हैं स्वामी विवेकानंद भी भागने की सोचते है पर वहाँ का पुजारी चिल्लाकर बोलता है स्वामी विवेकानंद से की भागो मत खड़े रहो स्वामी विवेकानन्द पुजारी की बात सुनकर खड़े हो जाते हैं और बन्दरों को देखने लगते है