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Story in hindi - सेठ और भिखारी

     Motivational story in hindi



Hi दोस्तों आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग पर MOTIVATIONAL STORY IN HINDI कभी कभी जब हम लगातार असफल होते हैं या अपने जीवन मैं सफल नही हो पाते तो अपनी किस्मत को दोष देते है। भगवान से शिकायत करते हैं कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है । यह कहानी उन लोगो को शिक्षा देती है जो हर बात पर भगवान या फिर किस्मत को दोष देते है। शुरू करते हैं आज की कहानी

सेठ और भिकारी

बहुत समय पहले रामपुर नाम का एक शहर था। उस शहर में एक भिखारी रहता था । जो एक मंदिर के बहार भीख मागा करता था। वह रोज भगवान से शिकायत करता की अपने सभी लोगो को इतना अच्छा जीवन दिया है, रहने को अच्छे मकान, पहनने को अच्छे अच्छे कपडे दिए हैं। और मुझे भिकारी बना दिया। दो वक्त की रोटी के लिए दिन भर भीख मांगना पड़ता है। मेरी जिंदगी तो पूरी बर्बाद कर दी भगवान अपने इस प्रकार वह अपनी जिंदगी से बहुत दुखी रहता था।
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एक दीन वह भिखारी घूमते घूमते उस शहर के
सबसे बड़े सेठ गोपालदास की हवेली के सामने से गुजर रहा था। सेठ की हवेली देखकर भिकारी जोर जोर से चिल्लाकर बोलने लगा " हे भगवान तू ने इस सेठ को कितना धन दिया है इतनी बड़ी हवेली दी है, इतनी शान और शौकत दी है और मुझे भिखारी बना दिया"। जब भिखारी चिल्ला रहा था । तो सेठ गोपाल दास ने आवाज सुनी और अपने सेवकों से बोला की पता करो ये हवेली के बहार कौन चिल्ला रहा है और उसे मेरे पास लेकर आओ। यह सुनकर सेवक भिखारी के पास जाते है और बोलते हैं कि तुम यहाँ इस तरह क्यों चिल्ला रहे हो हमारे साथ चलो तुम्हें सेठजी ने बुलाया है। यह सुनकर भिखारी डर जाता है और काँपने लगता है उसे लगता है कि सेठजी ने सब सुन लिया और अब वो मुझे दण्ड देगे। वह डरता हुआ सेठ जी के पास पहुँचता है। सेठ गोपाल दास उस भिखारी को ऊपर से नीचे तक घूर कर देखते हैं फिर बोलते हैं बताओ तुम्हें क्या तकलीफ है क्यों चिल्ला रहे हो। भिखारी ने हाथ जोड़कर कहा सेठ जी मैं तो भगवान को कोस रहा था कि उन्होंने आपको कितना सारा धन दिया है और मुझे कुछ भी नही दिया। सेठ ने भिखारी की बात सुनकर कहा अच्छा तो तुमको धन चाहिए । मैं दूँगा तुमको धन पर इसके बदले में तुम्हें मुझको कुछ देना पड़ेगा। भिखारी ने कहा सेठ जी मेरे पास क्या है जो मैं आपको दूँगा। सेठ ने कहा अपनी एक आँखे मुझे दे दो बताओ इसके लिए तुम्हे कितना रुपया चाहिए। यह सुनकर भिखारी खुश हो जाता है और बोलता है दस हजार रुपए चाहिए मुझे। सेठ जी अपने मुनीम से बोलते हैं इस दस हजार रुपए देकर इसकी आंख निकाल लो। यह सुनकर भिखारी को लगता है कि उसने कीमत कम बताई है इसलिए सेठ इतनी जल्दी तैयार हो गया। भिखारी बोलता है सेठजी मुझ दस हजार नही एक लाख रुपए चाहिए । सेठजी , मुनीम से इसे एक लाख रुपए देकर इसकी एक आंख निकाल लो। फिर भिखारी सोचता है कि फिर उठाने कम कीमत बताई। वह फिरI बोलता है सेठ जी मुझे एक करोड़ रुपए चाहिए। सेठ मुनीम से बोलते हैं इस एक करोड़ रुपए देकर इसकी आंख निकाल लो। अब भिखारी सोचने लगता है कि एक आंख की कीमत एक करोड़ तो इस पुरे शारीर की कीमत कितनी होगी भगवान ने मुझे इतना अनमोल शारीर दिया है फिर भी में भगवान को दोष देता रहा। अब भिखारी रोने लगता है और सेठ से बोलता है कि सेठजी अपने आज मेरी आँखें खोल दी । मुझे अपनी आंख नही बेचनी मुझे क्षमा करें। सेठ जी ने मुस्कुराते हुए कहा मैं बस तुम्हे इतना समझना चाहता था कि भगवान ने हम सबको इतना अनमोल जीवन दिया है हमारा जीवन में सफल होना हमारी मेहनत पर निर्भर करता है न की हमारी किस्मत पर इसलिये तुम मेहनत करो मुझे यकीन है कि एक दिन तुम जरूर सफल होंगे जीवन में। भिखारी ने सेठजी की बात सुनकर मन में दृढ़ संकल्प ले लिया की अब वह भीख नही मागेगा कड़ी मेहनत करेगा और जीवन में सफल व्यक्ति बनेगा।

MORAL OF STORY :-

     दोस्तों ये कहानी हम सीख देती है कि हमे भगवान बहुत सारी अनमोल चीजें दी हैं आँखे दी है इसके लिए हम भगवान को धन्यवाद कर सकते है क्योंकि बहुत से व्यक्ति ऐसे है जो देख नही सकते । पैर दिए है जबकि बहुत सारे ऐसे व्यक्ति हैं जो चल नही सकते। अतः हम जैसे भी हैं best हैं और किसी भी कार्य में सफल होना है तो कड़ी मेहनत करना पड़ेगा। so आज से भगवान और किस्मत को दोष देना छोड़िये।


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