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Betal pachis tisari kahani in hindi

Hi दोस्तों स्वागत है आपका inhindistory. com पर आज betal pachisi सीरीज की तीसरी कहानी पोस्ट कर रहे हैं:-



   Betal pachis tisari kahani in hindi


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शिशपा-वृक्ष पर चढ़कर विक्रमादित्य ने फिर बेताल को उतारा और उसे कंधे पर
डालकर चुपचाप भिक्षु की ओर चल पड़ा। कुछ आगे चलने पर शव में बैठा बेताल फिर
से बोला-"राजन, रात के समय इस भयानक श्मशान में आते-जाते तुम घबरा नहीं रहे
हो, यह आश्चर्य की बात है। लो, तुम्हारे जी बहलाने के लिए मैं तुम्हें फिर एक कथा
सुनाता हूं।"Betal pachis tisari kahani in hindi
पाटलीपुत्र नाम का एकजगत-विख्यात नगर है। प्राचीन काल में वहां विक्रम केसरी
नाम का एक राजा था, जिसके पास ऐश्वर्य के सारे सामान मौजूद थे। उसका खजाना
बहुमूल्य रलों से सदैव ही भरा रहता था। उसके पास एक शुक (तोता) था जिसने श्राप
के कारण यह जन्म पाया था। वह तोता समस्त शास्त्रों का ज्ञाता और दिव्य ज्ञान से युक्त
था। उस तोते का नाम था-विदग्धचूड़ामरिन।
उस तोते के परामर्श से राजा ने अपने समान कुल वाली मगध की राजकुमारी
चंद्रप्रभा से विवाह किया। उस राजकुमारी के पास भी सोमिका नाम की एक वैसी ही
सारिका (मैना) थी जो समस्त विज्ञानों को जानने वाली थी। वे दोनों तोता-मैना अपने
बुद्धिबल से अपने स्वामियों (पति-पत्नी) की सेवा करते हुए, वहां एक ही पिंजरे में रहते
थे। एक दिन उत्कंठित होकर उस तोते ने मैना से कहा-"सुभगे, तुम मेरे साथ एक
सेज पर सोओ, एक आसन पर बैठो, एक साथ भोजन करो और हमेशा के लिए मेरी ही
होजाओ।"Betal pachis tisari kahani in hindi
___ मैना बोली-"मैं पुरुष जाति का संसर्ग नहीं चाहती, क्योंकि वे दुष्ट और कृतघ्न
होते हैं।"
___ मैना की बात सुनकर तोता बहुत आहत हुआ। उसके स्वाभिमान को ठेस पहुची।
वह बोला-"तुम्हारा यह कथन बिल्कुल मिथ्या है, मैना । पुरुष दुष्ट नहीं होते, दुष्टा तो
स्त्रियां होती हैं और वे क्रूर हृदय वाली भी होती हैं।"
तोते की बात पर दोनों में झगड़ा पैदा हो गया। तब उन दोनों ने शर्त लगाई कि यदि
मैना झूठी हो तो वह तोते से विवाह कर लेगी और यदि तोते की बात गलत निकले तो वह
मैना का दास बन जाएगा। निर्णय के लिए वे दोनों राजसभा में बैठे हुए राजपुत्र के पास
गए।Betal pachis tisari kahani in hindi
अपने पिता के न्यायालय में बैठे हुए राजपुत्र ने जब उन दोनों के झगड़े का वृत्तांत
सुना, तब उसने मैना से कहा-“सारिका,पहले तुम यह बतलाओ कि पुरुष किस प्रकार
कृतज होते हैं?"मैना ने कहा- “सुनिए।"
अपने पक्ष की पुष्टि के लिए उसने पुरुषों का दोष सिद्ध करने वाली यह कथा सुनाई।
सारिका द्वारा सुनाई हुई कथा
इस धरती पर कामंदिका नाम की एक बहुत बड़ी नगरी है। वहां अर्थदत्त नाम
का एक बहुत धनी व्यापारी रहता था। व्यापारी के यहां एक पुत्र ने जन्म लिया तो
व्यापारी ने उसका नाम धनदत्त रखा। पिता की मृत्यु के बाद धनदत्त बहुत उच्छृखल
हो गया। वह बुरे लोगों की संगति में उठने-बैठने लगा। उसके कुछ धूर्त मित्रों ने उसे
जुआ आदि दुर्व्यसनों में डाल दिया।
थोड़े ही दिनों में, इन व्यसनों के चलते धनदत्त का सारा धन जाता रहा।Betal pachis tisari kahani in hindi

लज्जावश स्वदेश छोड़कर विदेश भ्रमण हेतु चल दिया।
चलते-चलते वह चंदनपुर नाम के एक गांव में पहुंचा। वहां, भोजन के निमित्त उसने
एक व्यापारी के घर में प्रवेश किया। व्यापारी ने धनदत्त को कुलीन परिवार का समझकर
उसका कुल आदि पूछा और फिर आदर सहित अपने घर में ठहरा लिया। व्यापारी
धनदत्त के व्यवहार से इतना खुश हुआ कि उसने रत्नावती नाम की अपनी कन्या भी उसे
ब्याह दी और दहेज में ढेर सारा धन भी दे दिया। तब वह धनदत्त वहीं अपने श्वसुर के
घर में रहने लगा।Betal pachis tisari kahani in hindi

कुछ समय बीतने पर, सुख के कारण वह अपनी पिछली दुर्गति भूल गया। धन
मिल जाने से वह फिर व्यसनों मे फंस गया और स्वदेश जाने के लिए उद्यत हो गया।
रलावली अपने माता-पिता कि इकलौती संतान थी, अतः वह व्यापारी उसे
अपने पास से दूर नहीं जाने देना चाहता था। लेकिन उस दुष्ट ने बड़ी कठिनाई से
किसी तरह उसे अनुमति देने के लिए विवश कर दिया। अनंतर, एक वृद्धा के साथ,
गहनों से अलंकृत अपनी स्त्री को लेकर वह उस देश से चल पड़ा।
Betal pachis tisari kahani in hindi
चलते-चलते वे बहुत दूर तक जंगल में जा पहुंचे। वहां चोरों का भय बतलाकर
उसने अपनी स्त्री के गहने लेकर अपने पास रख लिए।
___धन के लोभ से उस पापी ने अपनी गुणवती स्त्री और उस वृद्धा को एक खंदक में
धकेल दिया। खंदक में गिरते ही वृद्धा तो मर गई लेकिन झाड़ियों में उलझजाने के कारण
उसकी पली नहीं मरी। किसी तरह वह रोती-बिखलती उस खंदक से बाहर निकल
आई। उसका शरीर क्षत-विक्षत हो गया था। जगह-जगह राह पूछती वह बड़ी कठिनाई
से अपने पिता के घर पहुंच पाई।
____ अचानक इस रूप में उसके लौट आने पर उसके माता-पिता सकते में आ गए।
उन्होंने कारण पूछा तो रोते-रोते उसने कहा-"पिताजी, डाकुओं ने हमें मार्ग में लूट
लिया । वे मेरे पति को बांधकर ले गए। उन्होंने मुझे और वृद्धा को खंदक में फेंक दिया।हर्षवती नाम की एक नगरी में एक धनवान बनिया रहता था। वासुदत्ता नाम की
उसकी एक कन्या थी, जो अत्यंत सुंदर थी। बनिया उसे अपने प्राणों से भी अधिक
प्यार करता था। उसने अपनी उस कन्या का विवाह समुद्रदत्त नाम के एक सजातीय
युवक के साथ कर दिया जो सज्जनों के निवास स्थान ताम्रलिपि में रहता था।Betal pachis tisari kahani in hindi
समुद्रदत्त सज्जन था। वह वासुदत्ता के समान ही रूप-यौवन वाला था। संदर स्त्रियां
उसकी ओर इस तरह टकटकी लगाए देखती थीं जैसे चंद्रमा को चकोर देखता है।Betal pachis tisari kahani in hindi
____एक बार जब वासुदत्ता का पति अपने देश में था और वह अपने पिता के घर
थी, तो उसने दूर से एक पुरुष को देखा। उस सुंदर युवक को देखकर वह चंचल
स्त्री कामातुर हो गई और अपनी सखी द्वारा उसे गुप्त रूप से बुलवाकर उसके साथ
काम-क्रीड़ाएं कीं। उसके बाद भी वह उससे गुप्त रूप से अनेकों बार मिली। उसकी
उस सखी के अलावा किसी और को उसकी करतूतों का पता न चला।Betal pachis tisari kahani in hindi
___एक दिन उसका पति अपने देश से वापस लौटा तो उसके सास-श्वसुर ने उसका
बहुत आदर-सत्कार किया और उसे उचित मान-सम्मान दिया। अपनी इकलौती
संतान वासुदत्ता का पति होने के कारण उनके लिए वह सबसे प्रिय व्यक्ति था।Betal pachis tisari kahani in hindi
वह सारा दिन उत्सव-उल्लास में बीता। रात में वासुदत्ता की माता ने अपनी बेटी
को सजा-संवारकर उसके पति के शयनकक्ष में भेजा। कितु एक ही सेज पर सोकर
भी वह अपने पति के प्रति अनुरक्त न हुई। दूसरे पुरुष में मन लगा रहने के कारण,
पति के आग्रह करने पर भी वह नींद आने का बहाना किए पड़ी रही। तब राह की
थकावट और मदिरा के नशे से चूर उसके पति को जल्द ही नींद आ गई। धीरे-धीरे
घर के सब लोग सो गए किंतु करवट लिए वासुदत्ता जागती हुई अपने प्रेमी के
विचारों में खोई रही। तभी एक चोर उसके महल में दाखिल हुआ और वासुदत्ता को
जागता हुआ महसूस कर एक अंधेरे कोने में सिमटकर खड़ा हो गया। वासुदत्ता
अपने प्रेमी से मिलने को बेचैन हो रही थी। उसने अपने प्रेमी से दिन में ही यह मालूम
कर लिया था कि रात के समय उन्हें कहां मिलना है। अतः वह चुपचाप उठी और
खूब गहने पहनकर, सज-संवरकर, अपने प्रेमी से मिलने महल से निकल पड़ी।
यह देखकर उस चोर को बहुत आश्चर्य हुआ। उसने सोचा कि 'जिन गहनों की
चोरी करने मैं यहां आया हूं, वह गहने तो यह स्त्री पहनकर बाहर जा रही है। अतः
इसका पीछा करके यह तो देखू कि यह कहां जा रही है ? रास्ते में ही इसके गहने भी
लूट लूंगा।' यही सोचकर वह चोर भी चुपचाप उस वणिकपुत्री पर नजर रखता
हुआ, छिपकर उसके पीछे-पीछे चलने लगा।
कुछ दूर जाने पर चोर ने देखा कि वणिकपुत्री की एक सखी उसके लिए कुछ फूल
और मालाएं लिए एक उद्यान में घुस गई जहां उसके प्रेमी ने उससे मिलने का वचन दे रखा
था।Betal pachis tisari kahani in hindi
वासुदत्ता जब प्रेमी द्वारा बताए मिलन-स्थल पर पहुंची तो उसने अपने प्रेमी को एकवृक्ष पर मृत अवस्था में लटकता हुआ देखा। हुआ यूं था कि जब वह युवक चोरी-छिपे
उद्यान में प्रवेश कर रहा था तो नगर रक्षकों ने उसे कोई चोर समझा और उसे पीट-पीटकर
मार डाला । फिर उसी उद्यान में उसके गले में फांसी का फंदा डालकर उसे वृक्ष से लटका
दिया। अपने प्रेमी को इस अवस्था में देखकर वासुदत्ता स्तब्ध रह गई। वह विह्वल और
उद्भ्रांत होकर चीख पड़ी-"हाय मैं मारी गई।" तदोपरांत वह भूमि पर गिरकर करुण
स्वर में विलाप करने लगी। जब वह कुछ चैतन्य हुई तो उसने अपने प्रेमी को वृक्ष से
उतारकर भूमि पर रखा और उसे फूलों से सजाया ।
प्रीति और शोक से उसका हृदय विवेकशून्य हो गया था। उसने उस निष्प्राण
शरीर का आलिंगन किया और उसका मुख ऊपर उठाकर, वह ज्योंही उसका चुंबन
करने चली, त्योंही उसके प्रेमी ने, जिसके शरीर में बेताल प्रविष्ट हो गया था, अचानक
अपने दांतों से उसकी नाक काट ली।
पीड़ा से तिलमिलाकर वासुदत्ता तुरंत उससे दूर हट गई। लेकिन इस विचार से
कि 'कहीं वह जीवित तो नहीं है ?" वह अभागिनी फिर से आकर उसे देखने लगी।
जब उसने देखा कि उसके शरीर से बेताल चला गया है और वह निश्चेष्ट तथा मृत है,
तब वह डर गई और हारी-सी, रोती हुई, धीरे-धीरे महल की ओर लौट पड़ी।Betal pachis tisari kahani in hindi
उस चोर ने छिपकर यह सारी बातें देखीं। उसने सोचा-'इस पापिनी ने यह
क्या किया ? अरे, स्त्रियों का हृदय तो बहुत भयानक, घने अंधेरे से भरा, अंधे कुएं
के समान और बड़ा गहरा होता है। चलूं, देखू अब यह क्या करती है।' ऐसा
सोचकर कौतूहल के कारण वह दूर से ही फिर उसका पीछा करने लगा।
वणिकपुत्री अपनी उस कोठरी में पहुंची, जहां उसका पति सोया पड़ा था। तब
वह जोर-जोर से रोती हुई चिल्लाने लगी-"बचाओ...बचाओ। पति के रूप में इस
दुष्ट ने मेरी नाक काट ली है।"Betal pachis tisari kahani in hindi
___इस तरह बार-बार उसका रोना-चिल्लाना सुनकर उसके कुटुंबीजन और माता-पिता
सभी घबराए हुए जागकर उनके शयनकक्ष में पहुंचे। वहां पहुंचकर जब उसके पिता ने
देखा कि वासुदत्ता की नाक कटी हुई है और उसकी नाक से रक्त बह रहा है, तब उसके
पिता ने क्रोध में आकर अपने जमाताको भार्याद्रोही जानकर रस्सी से बांध दिया।Betal pachis tisari kahani in hindi
___वासुदत्ता की बातें सुनकर उसका पिता तथा अन्य सभी लोग समुद्रदत्त के
प्रतिकूल हो गए थे। अतः बांधे जाने पर भी उसने गूंगे की तरह कुछ न कहा। इसी
हो-हल्ले में धीरे-धीरे रात बीत गई। तब, सब कुछ जानता हुआ भी वह चोर, चुपके
से वहां से चला गया।Betal pachis tisari kahani in hindi
समुद्रदत्त का श्वसुर वह बनिया, उसे तथा कटी नाक वाली अपनी बेटी को लेकर
राजा के दरबार में पहुंचा। सारा वृत्तांत सुनने के बाद राजा ने समुद्रदत्त को दोषी मानते
हुए उसे प्राणदंड की आज्ञा दे दी। अनंतर, जब बांधकर उसे वधस्थल की ओर ले जाया
जा रहा था, तब वह चोर राजा के आदमियों के पास आकर बोला-“हे अधिकारियों,अकारण ही इस व्यक्ति को प्राणदंड नहीं देना चाहिए। यह निर्दोष है, सारी बातें मैं
जानता हूं। तुम लोग मुझे राजा के पास ले चलो, जिससे मैं उन्हें सारा वृत्तांत कह सकू।"
___ उसके ऐसा कहने पर कर्मचारी उसे राजा के पास ले गए। वहां अभयदान
मांगकर उस चोर ने आरंभ से उस रात की सारी बातें राजा को कह सुनाईं। उसने
राजा से कहा-"महाराज. यदि आपको मेरी बातों पर विश्वास न हो तो सत्य की
स्वयं ही जांच करवाएं। इसकी कटी हुई नाक अब भी उस शव के मुंह में है।"
___यह सुनकर राजा ने देखने के लिए अपने अनुचरों को उद्यान में भेजा और जब
सच्चाई मालूम हुई तो उसने समुद्रदत्त को रिहा कर दिया। राजा ने उस दुष्टा पत्नी के
कान भी कटवा दिए और उसे देश-निकाला दे दिया। उसने उसके श्वसुर की सारी
धन-संपत्ति भी जब्त करवा ली। इतना ही नहीं, उस चोर पर प्रसन्न होकर उसे नगर
का अध्यक्ष भी नियुक्त कर दिया।
___ इतनी कथा सुनकर तोते ने राजा से कहा- "हे राजन, इस संसार में स्त्रियां
ऐसी दुष्टा और स्वभाव से विषम होती हैं।" इतना कहते ही, उस तोते पर से इंद्र का
श्राप जाता रहा और वह चित्ररथ नाम का गंधर्व बनकर, दिव्य शरीर धारण कर स्वर्ग
को चला गया। उसी तरह तत्काल ही मैना का भी श्राप दूर हो गया और वह भी
तिलोत्तमा नाम की अप्सरा बनकर सहसा ही स्वर्ग चली गई।
___ यह कथा सुनाकर बेताल ने राजा विक्रमादित्य से पूछा- “राजन, तोता-मैना के
अपने-अपने आक्षेपों का निराकरण हो गया था। अब तुम बताओ कि स्त्रियां निंदित
होती हैं अथवा पुरुष ? जानते हुए भी यदि तुम कुछ नहीं बताओगे तो तुम्हारा
मस्तक टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।"Betal pachis tisari kahani in hindi
___ कंधे पर बैठे हुए बेताल की बातें सुनकर राजा ने कहा- "हे बेताल, निदिंत तो
स्त्रियां ही होती हैं। पुरुष शायद ही कोई, कभी और कहीं, वैसा दुराचारी होता है
लेकिन ज्यादातर स्त्रियां प्रायः सभी जगह और सदा ही, वैसी होती हैं।"Betal pachis tisari kahani in hindi
राजा के ऐसा कहते ही बेताल पहले की तरह फिर उसके कंधे से गायब हो
गया। राजा भी उसे वापस लेने के लिए फिर से उसी वृक्ष की ओर चल पड़ा।
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