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सोच ....best motivational story in hindi

सोच best motivational story in hindi

Hi दोस्तों स्वागत है आपका inhindistory.कॉम पर सोच एक best motivational story in hindi जो 
आपके जीवन मे सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। आज जो भी सक्सेस व्यक्ति हैं उसका एक मात्र कारण उनकी सोच है जो उनको अन्य व्यक्ति से अलग बनाती है। ज्यादातर लोग बढ़ा सोचते ही नही तो आप ही बताओ वो बढ़ा कैसे बन सकते हैं । यदि मुझे तैरना सीखना है तो पहले यह एक विचार मन में आना जरुरी है कि मुझे तैरना सीखना है। जब एक बार हमने सोच लिया की तैरना है तो बाकी चीजें अपने आप हमारे दिमाग में आती जाती हैं जैसे की तैरना सीखना है तो हम किसी तैरने वाले से पूछते हैं कि भाई तुम ने तैरना कैसे सीखा फिर वह अपने अनुभव बताता है और साथ ही कई सारी टिप्स भी देता है। हम उनको follow करते हुए धीरे धीरे practice करते हैं और एक दिन सीख़ जाते हैं । पर हम ध्यान दें कि हम सीखे कैसे तो आपको पता चलेगा कि अपनी सोच की वजह से अब मैं आपका ज्यादा time न लेते हुए start करता हूँ

 सोच best motivational story in hindi:-

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आज रामपुर स्कूल में कभी हलचल थी । कोई कुर्सियों को अच्छी तरह व्यवस्थित कर रहा था तो कोई माइक को चेक कर रहा था। कुछ छात्र सांस्कृतिक कार्यक्रम की तैयारी कर रहे थे तो सभी शिक्षक भी काफी  व्यस्त लग रहे थे । क्योंकि आज जिला के कलेक्टर साहब स्कूल में आने वाले थे खास बात यह थी की collector साहब इसी स्कूल के पूर्व छात्र थे ।कुछ ही देर में collector साहब की गाड़ी स्कूल में प्रवेश करती है । अपनी कार की खिड़की खोलकर कलेक्टर साहब ने बाहर देखा और सोचने लगे की स्कूल कुछ खास नही बदला है आज भी वो नीम का पेड़ गेट के पास ही है जिसकी छाँव में वो और उनके दोस्त लांच करते थे। बाकि सभी school के छात्र क्लास रूम में ही खाना खाते थे पर collector साहब और उनके दोस्त उस पेड के नीचे ही खाना खाते थे ।  इन ख्यालों में खोए हुए थे की उनकी नजर चपरासी रघु पर पड़ी । रघु के चेहरे पर कुछ झुर्रियां आ गई थी जो बता रही थी की समय कितना कुछ बदल देता है । कलेक्टर साहब को आज भी याद है जब कभी वो late है जाते थे । तो teacher से ज्यादा उनको raghu से डाँट खानी पड़ती थी । अब कार रुक गई और कलेक्टर साहब कार से उतरे ही थे की सामने शर्माजी अभिवादन करते हुए दिखे कलेक्टर साहब ने भी मुस्कुरा कर अभिवादन किया । शर्माजी math के टीचर थे और बहुत ही गुस्सेल स्वभाव वाले। स्कूल के दिनों में सभी छात्र के साथ साथ कलेक्टर साहब भी शर्माजी से बहुत डरते है । शर्माजी ने कलेक्टर साहब का स्वागत किया । और उन्हें मंच पर पर आने के लिए बोला । जैसे ही कलेक्टर साहब मंच पर पहुँचे तो चारों तरफ तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी । उन्होंने माइक संभाला और बोलना प्रारम्भ किया
" आज मैं आप सभी को मेरे बारे में बताना चाहता हूँ  क्योंकि मुझे पता है कि यहाँ उपस्थित ज्यादातर छात्र यही जानना चाहते हैं कि मैंने अपने जीवन में इतनी सफलता कैसे प्राप्त की ऐसा क्या है मेरे अंदर जो भीड़ से हटकर अपना एक नया मुकाम हासिल किया। आपको लगता होगा की मैं कोई बहुत ही टैलेंटेड व्यक्ति हूँ। शायद पड़ने में बहुत ज्यादा होशियार । पर ऐसा बिल्कुल भी नही है जब मैंने 10th स्टैण्डर्ड पास किया तो मेरे इतने कम नंबर आये की मेरे घरवालों और दोस्तों ने बोला तेरा कुछ नही हो सकता । तू 12th में साइंस विषय नही ले सकता क्योंकि तेरे नंबर कम है और वो बहुत ही कठिन विषय है। आमतौर पर हमारे यहाँ ये धारण बन गई है कि जिसके 10th में ज्यादा नंबर वो ही साइंस विषय ले सकता है । और जिसके कम उसके लिए एक ही ऑप्शन है art विषय तो मुझे भी art विषय लेना पड़ा मुझे लगने लगा था कि पढ़ना लिखना मेरी बस की बात नही है ।  बस जैसे तैसे स्कूल की पढ़ाई हो जाये तो अपने घर पर ही कुछ छोटा मोटा कोई काम करलू । मैं class में भी रोज नही जाता था और जाता था भी तो बस यहाँ से कैसे भागु बस यही सोचता था । पढ़ाई मेरे लिए एक बोझ हो गई थी। जिससे मैं जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहता था। जब हम किसी भी विषय के बारे में सोच बना लेते हैं की वह बुरी है तो हजार कारण मिल जाते हैं जो सिद्ध करते हैं कि वो चीज बुरी है। वैसे ही जब हम किसी विषय के बारे में सोच लेते हैं कि ये अच्छा है तो भी हजारों कारण मिल जाते हैं जो सिद्ध करते हैं कि वो चीज अच्छी है। खैर मेरी जिंदगी ऐसी ही चल रही थी मेरे परिवार, रिश्तेदारों , दोस्तों और खुद मुझको भी मुझ से कोई उम्मीद नही थी। फिर एक दिन जब मै स्कूल पहूँचा तो देखा की मेरी क्लास में एक नए सर पढ़ा रहे थे । मैं क्लास रूम के अंदर गया तो सर ने मुस्कुराकर पूछा इतने लेट क्यों आ रहे हो । मैंने भी जबाब दिया जल्दी आकार भी क्या कर लूँगा सर , सर ने बोला बहुत कुछ कर सकते हो अगर तुम चाहो तो , मैंने बोला सर अगर कुछ कर सकता तो art विषय क्यों लेता । सर ने फिर मुस्कुराकर बोला अच्छा तुमको लगता है कि जो art विषय लेता है वो कुछ नही कर सकता । मैं ने बोला हाँ सर सभी यही बोलते हैं। सर ने फिर मुस्कुराते हुए बोला अच्छा तो जो सभी बोलते हैं  इसलिए तुमको ऐसा लगता है , देखो लोग तो न्यूट्रॉन को भी बोलते थे की वो पागल है, एडिसन जिन्होंने बल्ब की खोज की उनको भी बोलते थे की कुछ नही हो सकता , पर बेटा उनकी सोच अलग थी , उन्होंने लोगो की बात नही मानी इसलिए आज हम जानते है कि वो सही थे और लोग गलत, हमें अपनी सोच पर चलना चाहिए न की दुनिया की सोच पर हर सब्जेक्ट हर इंसान खास होता है। बस हमे बड़ा से बड़ा सोचना चाहिए ऐसे लोगो से  इतिहास भरा पड़ा है जिन्होंने कम अंक लाकर भी बाद में बहुत बड़े बड़े कार्य किये । तुम भी कर सकते हो तुम में क्या कम है बताओ तो अपने परिवार को रिस्तेदारों को, दोस्तों को और स्वयं तुम को भी की तुम किसी से कम नही। बस आज से अपनी सोच बड़ी कर लो फिर देखो कैसे लोग तुम्हारी इज्जत करते हैं । जब तक तुम खुद अपनी इज्जत नही करोगे तो दूसरे क्यों करेंगे । बस एक बात मान लो आज ही ऐसी पल से अपनी सोच बड़ी कर लो फिर देखो चमत्कार । सर ऐसा कहते हुए मुस्कुरा रहे थे और मैंने उसी समय सोच लिया की मैं अपने जिले का कलेक्टर बनूगा"
इस तरह मेरी सोच बदली और मैं आज किस मुकाम पर हूँ । वो तो आप सब जानते ही हैं। मैं आप सब से यही कहना चाहता हूँ की लाइफ में कुछ बड़ा करना है । यो अपनी सोच बड़ी करो । इतना कहकर कलेक्टर साहब ने अपनी स्पीच ख़त्म की आज स्कूल के सभी छात्रों को सफलता का एक नया मन्त्र मिल गया था । जो उनके चेहरे पर मुस्कान के रूप में झलक रहा । शर्मा सर भी ताली बजा रहे थे । आज उन होने भी बहुत बड़ी बात सीखी थी।

Moral of story :- हम लाइफ में कुछ बड़ा करना है । तो हमारी सोच भी बड़ी होनी चाहिए। 
                              Write by Gaurav rajput

यदि आपके पास भी कोई motivational story हो तो आप हमको inhindistory@gmail.com पर भेज सकते हैं। 
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