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Nice line - गरीब मीलों चलता है भोजन पाने के लिए, अमीर मीलों चलता है,  उसे पचाने के लिए, किसी के पास खाने के लिए एक वक्त की रोटी नहीं, किसी के पास एक रोटी खाने के लिए वक्त नहीं। कोई अपनो के लिए, अपनी रोटी छोड़ देता है। कोई रोटी के लिए अपनो को छोड़ देता है दौलत के लिए सेहत खो देता है सेहत पाने के लिए  दौलत खो देता है। जीता ऐसे है जैसे कभी मरेगा नहीं, और मर ऐसे जाता है जैसे कभी जीया ही नहीं। एक मिनट में ज़िन्दगी नहीं बदलती एक मिनट में लिया गया फैसला, जिन्दगी बदल देता है 1.  स्वयं को कभी कमजोर साबित मत होने दें क्योंकि.. डूबते सूरज को देखकर लोग - घरों के दरवाजे बंद करने लगते हैं ! 2. मुझे जिंदगी का तजुर्बा तो नहीं पर इतना मालूम है, छोटा इंसान बडे मौके पर काम आ सकता है। 3. न तेरी शान कम होती, न रुतबा घटा होता .. जो गुस्से में कहा, वही हंस के कहा होता .. 4. हमारी हैसियत का अंदाजा ... तुम ये जान के लगा लो, हम कभी उनके नहीं होते जो हर किसी के हो जाएं ... 5. कुछ लोग खुद को शेर समझते है, मगर हम वो इन्सान है, जो शेरों को भी कुत्ते जैसा घुमाते है 6.बात उन्ही कि होती है जिनमे कोई बात  होती है। 7. श

पाँच बातें - हिंदी बेस्ट मोटिवेशनल कहानी

Hi दोस्तों स्वागत है आपका inhindistory पर
आज आपके लिए एक बहुत ही शिक्षाप्रद स्टोरी लेकर आये हैं
उम्मीद है आपको काफी पसंद आएगी ।

  पाँच बातें - हिंदी बेस्ट मोटिवेशनल कहानी


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बहुत समय की बात है एक गाँव मे शिवपाल नाम का एक युवक रहता था । उसकी माँ की death हो गयी तो उसके बाप ने दूसरी शादी कर ली । सौतेली माँ शिवपाल पर बहुत जुल्म करती थी। उसको खाना भी जो बच जाता वो ही मिलता । और घर के सारे काम भी शिवपाल ही करता था। काम करने में कुछ गलती हो जाती तो उसकी सौतेली माँ उसको बहुत मरती थी । इन सारे गम को और अपनी सारी समस्याओं को शिवपाल गाँव एक बूढ़े को बताता जिस उसको कुछ तसल्ली मिलती । वह बूढ़ा व्यक्ति भी शिवपाल को काफी चाहता था । वह शिवपाल को समझता और बहुत सारी ज्ञान की बातें बताता । शिवपाल भी उस बूढ़े व्यक्ति के पास जाकर अपने सारे गम भूल जाता। 
 एक दिन शिवपाल एक पोटली के साथ बूढ़े के पास पहुँचा और बोला बाबा आज इस गाँव से मेरा दान पानी उठ गया । अब मे इस गाँव को छोड़कर जा रहा हूँ। अब मुझ से माँ की गाली और बरदास्त नही होती हैं।
बूढ़े ने बोला :-  बेटा और अच्छे से सोच लो इस अजनवी दुनिया में कहाँ जायोगे ।
शिवपाल :- कहीं भी चला जाऊँगा पर अब यहाँ नही रहूँगा।

बूढ़े ने जब यह जान लिया की अब शिवपाल मानेगा नही तो बोला बेटा जा रहे हो तो जाओ पर कहीं भी रहो । मेरी ये पाँच बातें हमेशा याद रखना 
1. जो तुम्हारा भला करे उसकी हर बात मनो।
2. किसी के दिल दुखाने वाली बात काफी मत करो ।
3 अपने कार्य को ईमानदारी से करो।
4. जिसने तुम्हारा भला उसका बुरा कभी मत करो।
5. जहाँ ज्ञान की बातें मिलें उन्हें जरूर सुनो।

शिवपाल ने बूढ़े की पाँचों बातों को ध्यान से सुना और वादा की की वह अपने जीवन में उनको जरूर अमल में लायेगा । 
इस प्रकार शिवपाल बूढ़े व्यक्ति से विदा लेकर चल पड़ा । 
चलते चलते वह एक शहर में पहूँचा । उसे काम की जरुरत थी किसी ने बताया कि यहाँ के राजा का एक मंत्री है  उसे एक नौकर की आवश्यकता है । शिवपाल उस मंत्री से मिला मंत्री ने शिवपाल को देखा और और पूछा बताओ तुम क्या कार्य कर सकते हो । शिवपाल ने जवाब दिया जो कोई न कर सके वो कार्य में करूँगा । मंत्री ने शिवपाल को अपने यहाँ काम पर रख लिया।

एक बार राजा शिकार के लिए जा रहा था तो मंत्री न शिवपाल को भी साथ रख लिया । शिकार खेलते खेलते राजा एक बहुत ही वीरान क्षेत्र में पहुँच गया । राजा के साथ और भी बहुत सारे लोग थे । सभी को काफी प्यास लगी थी । पर चारो तरफ पानी का कोई नामों निशान भी नही था । राजा और उसके सभी सैनिक और साथी प्यास से व्याकुल हो रहे थे । साथ ही घोडा और हाथी को भी प्यास लगी थी और उनकी हालत ऐसी नही थी की वो आगे जा सके । तभी राजा ने सैनिकों से कहा जाओ पता लगाओ शायद आस पास कोई गाँव हो । तो वहाँ के मुखिया को लेकर आओ । सैनिक गाँव की तलाश करने लगे और सौभाग्य से एक छोटा सा गाँव मिल भी गया सैनिक उस गाँव के मुखिया को लेकर राजा के पास गए। राजा ने मुखिया से कहा जल्दी हमारे लिए जल की व्यवस्था करो हम और हमारे हाथी घोड़े प्यास से बहुत व्याकुल हैं। मुखिया ने हाथ जोड़कर कहा महाराज हमारे एक में बस छोटा सा कुआँ है। उससे हम गाँव वालों का ही गुजारा बहुत मुश्किल से होता है । आप सबके लिए वहाँ पर्याप्त पानी की व्यवस्था नही हो पायेगी । पर अगर कोई हिम्मत करे तो यहाँ एक पुरानी बाबड़ी है जिसमे बहुत सारा पानी है । पर वहाँ एक दैत्य का निवास है। आज तक जो भी वहाँ गया है लौटकर नही आया । राजा ने मुखिया की बात सुनकर सैनिकों से कहा जाओ उस पुरानी बाबड़ी से पानी लेकर आओ । पर किसी भी सैनिक की हिम्मत नही हुए जाने की तभी मंत्री ने शिवपाल को बोला तुम जाओ और पानी लेकर आओ। शिवपाल मंत्री को जाने से मना करने ही वाला था कि उसे बूढ़े की पहली बात याद आ गयी।
" जो तुम्हारा भला करे उसकी हर बात मनो।"
शिवपाल ने जाने के लिये हाँ कर दी और वह दो मटके लेकर बाबड़ी से पानी लेने के लिए चल दिया।
कुछ देर में ही वह बाबड़ी के पास पहुँच गया बाबड़ी में पानी तक पहुँचने के लिए सीढ़ियां बनी हुए थी। नीचे काफी अँधेरा था । शिवपाल ने हिम्मत क्र सीढ़ियों से नीचे उतरना प्रारम्भ किया और पानी तक पहुँच गया। उसको भी बहुत प्यास लगी थी और बाबड़ी का जल बहुत ही शीतल था तो पहले शिवपाल ने मन भर कर पानी पिया फिर दोनों मटको को भर कर जैसे ही मुड़ा उसके सामने एक दैत्याकार व्यक्ति खड़ा था और वह अपने सीने से एक हड्डियों के ढांचे को चिपकाये हुए था । वह , शिवपाल से गरजकर बोला बताओ युवक मेरी बीवी कैसी है । शिवपाल ने देखा की दैत्य जिसको अपनी वीबी बोला रहा था । वह हड्डियों का ढांचा थी । शिवपाल उसकी पत्नी को हड्डियों का ढांचा बोलने ही बाला था कि उसे बूढ़े की दूसरी बात याद आ गयी की 
" किसी के भी दिल दुखाने वाली बात मत करो'

शिवपाल ने जवाब दिया अरे मैंने आज से पहले इतनी सुंदर स्त्री कभी देखी ही नही।

दैत्य शिवपाल का जवाब सुनकर बहुत खुश हुआ और बोला आज से पहले जितने भी लोग आए सबने मेरी पत्नी को हड्डी का ढांचा कहा और मैंने सबको मार दिया पर । तुम पहले व्यक्ति हो जिसने मेरी पत्नी को सुंदर कहा । मैं तुम से बहुत खुश हूं जो चाहो मुझ से माँग लो ।

शिवपाल ने कहा आप यदि मुझ से सचमुच खुश हैं तो इस बाबड़ी को छोड़कर चले जाइए जिससे लोग यहाँ अपनी प्यास बुझा सकें । दैत्य शिवपाल की बात मानकर चला जाता है । 
और शिवपाल भी मटकों में पानी लेकर राजा के पास पहुचता और सारी कहानी बता देता है। राजा शिवपाल से बहुत खुश होता है और उसे अपना वित्त मंत्री बना देता है । 

शिवपाल बूढ़े की तीसरी बात  " अपना काम ईमानदारी से करो।" को याद कर ईमानदारी से कम करता है।

राजा का एक भाई रहता है जो हमेशा खजाने से रुपए निकलता रहता था । पर जैसे ही शिवपाल वित्तमंत्री बना राजा के भाई अनावश्यक रूप से रुपए निकालने की दाल नही गल पा रही थी । उसने शिवपाल को लालच देने की कोशिश की पर शिवपाल नही माना । तो राजा के भाई ने कहा कि यदि तुम मेरा साथ दोगे तो में अपनी पुत्री का विवाह तुम से कर दूँगा । इतनी बड़ी बात सुनकर शिवपाल का ईमान डोलने लगता है पर उसी समय उसे बूढ़े की चौथी बात याद आ जाती है 
" जो भी तुम्हारा भला करे उसका कभी भी बुरा मत करो।"

इस बात को याद कर शिवपाल ने राजा के भाई को मना कर दिया । इससे राजा का भाई तिमिला जाता है और राजा के पास पहुँचकर राजा के कान भर देता है कि शिवपाल गद्दार है । राजा , अपने भाई की बातों में आ जाता है  और प्रतिज्ञा कर देता है कि जब तक वह शिवपाल का कटा हुआ सर नही देख लेता वह और उसका भाई भोजन को हाथ नही लगायें गे। ऐसी प्रतिज्ञा राजा चार कसाइयों को बुलाता है और उनसे बोलता है कि हमारा जो महल बन रहा है तुम वहाँ जाओ । आज एक व्यक्ति आयेगा और तुम से पूछेगा काम होने में कितनी देर है तुम उसका सिर काट देना। चारों कसाइयों के जाने के बाद राजा शिवपाल को बुलाता है और उससे बोलता है " शिवपाल तुम हमारे नए महल जाओ जो बन रहा है वहाँ चार लोग मिलेंगे उनसे पूछना की कम कितना बचा है।"

शिवपाल राजा की आज्ञा से महल की और चल देता है पर रास्ते में एक बहुत ही बड़े संत के प्रवचन हो रहे होते हैं तो शिवपाल को बूढ़े की पांचवी बात याद आ जाती है की

"जहाँ पर भी ज्ञान की बातें मिलें उन्हें ध्यान से सुनो।"

ये बात याद कर शिवपाल प्रवचन सुनने लगता है ।

यहाँ शाम होने को आती है पर शिवपाल के बारे में कोई खबर नही आती और राजा के भाई को बहुत भूख लगी होती है प्रतिज्ञा के कारण वह खाना नही खा सकता। राजा के भाई से अब बरदास्त नही होता वह स्वयं अपना सर को ढांक कर पता लगाने के लिए चल पड़ता है । और नए महल जा कर कसाईयों से पूछता है " काम कितना बचा है ।" 

कसाई जब ये सुनते हैं तो उनको लगता है कि ये वही है जिसका सर काटना है। चूँकि राजा का भाई अपना चेहरा छिपाकर रखे हुआ था । इसलिए कसाई पहचान नही पाते और राजा के भाई का सर धड़ से अलग कर देते हैं।

यहाँ जब राजा को असलियत का पता चलता है कि उसके भाई ने ही सडयंत्र रचा था क्योंकि शिवपाल राजा से गद्दारी करने से मना कर दिया था। तो राजा शिवपाल पर बहुत खुश होता है और अपनी पुत्री का विवाह शिवपाल से कर देता है



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