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लुई पास्चर story in hindi

लुई पास्चर story in hindi

अगर आपके अंदर कुछ कर गुजरने की चाह है । तो परिस्थितियां कैसी भी हों आपको फिर भी आपको आपकी मंजिल पाने से नही रोक सकती हैं। आज ऐसी ही एक story आपके साथ शेयर कर रहे हैं जो बताती है कि जब हौसले बुलंद हो और कुछ कर गुजरने की जिद्द हो तो फिर दुनिया में कोई भी इस कार्य नही जिससे किया न जा सके । लुई पास्चर story in hindi आप inhindistory.com  पर पढ़ रहे हैं।


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लुई पश्चर एक महान वैज्ञानिक थे। इन्होंने प्राणघातक बीमारी हाइड्रोफोबिया जो की रेबीज नामक वायरस से होती है इसके लिए टिके की खोज की । 

जन्म :- लूई पश्चर का नाम 27 दिसम्बर 1822 को फ़्रांस में हुआ था।

शिक्षा :- École Normale Supérieure

रेबीज के टीके की खोज की स्टोरी :- लुई पश्चर (Louis Pasteur) के पिता चमड़े का  कार्य करते थे । और वो चाहते थे की उनका बेटा लुई पढ़ लिख कर कुछ अच्छा कार्य करे । इसलिए उन्होंने अपने बेटे लुई पश्चर को अच्छे स्कूल में भर्ती करवाया। पर लूट पश्चर को कोई भी विषय जल्दी समझ में नही आता था । इस कारण स्कूल के अन्य students लुई पश्चर को मन्द बुद्धि कहकर उनका मजाक उड़ाया करते थे । 
         एक बार की बात है लुई पश्चर के गाँव में एक पागल भेड़िया खुश आया और उसने आठ लोगो को काट लिया जिससे उन लोगो को हैड्रोफोबिया नामक बीमारी हो गई ।और उन लोगो ने तड़प तड़प कर अपनी जान गंवा दी। इस घटना का मासूम लुई पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा । उन्होंने अपने पिता से पूछा की क्या इस बीमारी का कोई इलाज नही , पिता ने जबाब दिया अभी तक इस बीमारी का कोई भी इलाज नही है । पर तुम को इतना दुःख हो रहा है और तुम ऐसे लोगो को मरते हुए नही देखना चाहते तो तुम क्यों न इस बीमारी की दवा की खोज कर लेते । लुई ने निश्चित कर लिया की वो जरूर इस प्राणघातक बीमारी का इलाज ढूंढेगे ।
        लुई पश्चर प्रारम्भ में मन्द बुद्धि थे पर उनके पास दो गुण थे जो की एक महान व्यक्ति में होना चाहिए उत्सुकता और धीरज । लुई पश्चर ने लिखा है कि शब्द कोष में तीन शब्द सबसे  अच्छे हैं:-
1.इच्छाशक्ति
2.काम
3.सफलता




पास्चराइजेशन :-  लुई ने पास्चराइजेशन की खोज की उन्होंने बताया कि यदि शराब को 60 सेंटीग्रेड पर गर्म करते हैं । तो शराब को खराब करने वाले जीवाणु मर जाते हैं और शराब लंबे समय तक ख़राब नही होती।

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इस खोज के बाद भी लुई को शांति प्राप्त नही हो रही तो वो हैड्रोफोबिया का इलाज खोजना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपने परिवार आदि को छोड़कर पूरा ध्यान इस खोज में लगा दिया। वो जहां भी सुनते की उस जगह पर पागल कुत्ता या पागल भेड़िया है । वो अपनी जान जोखिम में डालकर उनको पकड़ते और उन पर अपना प्रयोग करते। 
             इस प्रकार लुई पश्चर ने हजारों प्रयोग किये पर उनको सफलता प्राप्त नही हो रही थी । फिर भी उन्होंने हार नही मानी और न ही अपने प्रयोग बन्द किये । क्योंकि अब भी उन्हें hydrofobiya से मारने वालों की दर्दनाक मौत दिखाई देती थी। ऐसे ही प्रयोग करते हुए उन्हें ख्याल आया की क्यों न रेबीज के निष्क्रिय वायरस को कुत्ते के शरीर में डाल दिया जाये ताकि कुत्ते का इम्युनिटी सिस्टम उससे लड़ने के लिए शक्ति विकसित कर सके। अब उन्होंने एक पागल कुत्ते के शरीर में रेबिज के निष्क्रिय वायरस को इंजेक्शन से प्रवेश कराया। और उन्होंने देखा कि पागल कुत्ते के अंदर रेबीज का वायरस खत्म हो गया और कुत्ता पूर्णतः सही हो गया। यह एक बहुत बढ़ी खोज थी। 
               लुई पश्चर ने इसका प्रयोग अभी केवल कुत्तों पर ही किया था। पर उनको यह पक्का विश्वाश नही था कि यह इंसानो पर भी ऐसे ही सफलता पूर्वक कार्य करेगा। लुई पश्चर अपने प्रयोग कर ही रहे थे कि उनके पास एक औरत आई और उसने लुई पश्चर को कहा कि एक कुत्ते ने उसके बेटे जोजफ को काट लिया है । किसी भी तरह आप मेरे बेटे को बचा लो वो मेरा एक मात्र पुत्र है। लुई पश्चर बहुत बड़े धर्म संकट में पड़ गये यदि वो बच्चे पर अपनी दवा का प्रयोग करते है और कहीं उस दवा न बच्चे पर कोई गलत प्रभाव डाला तो बच्चे की जान तो जायेगी ही साथ में लुई पश्चर को भी जेल जाना पड़ सकता है और यदि वो बच्चे पर दवा का प्रयोग नही करते तो बच्चा कुछ ही दिन में हाइड्रो फोबिया से तड़प तड़प कर अपनी जान गवां देगा। लुई पश्चर ने निर्णय लिया चाहे कुछ भी हो वो बच्चे को ऐसे मारने नही देंगे उस पर अपनी दवा का प्रयोग करेंगे। 
            लुई पश्चर ने पहले दिन जोजफ को थोड़ी मात्रा वाला इंजेक्शन लगया । और फिर धीरे धीरे दवा की मात्रा बढ़ाते गये । और उन्होंने देखा की कुछ दिन बाद ही जोजफ के अंदर रेबीज का वायरस पूर्णता नष्ट हो गया । आज लुई पश्चर की ख़ुशी का ठिकाना नही था आज उनका सपना पूरा हो गया था आज उन्होंने उस बीमारी का इलाज ढूंढ लिया था जो सदियों से मानव के लिए एक अबूझ पहेली बनी हुई थी । आज लुई पश्चर के चेहरे पर वही मुस्कान थी जैसी किसी मुसाफिर के चेहरे पर होती है जब वह अपनी मंजिल पर पहुँच जाता है।

Moral of story :-  यदि आप पूर्ण ईमानदारी और कड़ी मेहनत से कार्य करते हैं तो आज नही तो कल आप जरूर सफल होंगे।

यदि आपको लुई पश्चर की यह story पसन्द आयी हो । तो शेयर करें। यदि आपके पास भी कोई story हो तो हमें inhindistory@gmail.com पर send करें हम जरूर आपकी story को publish करेंगे।

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