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Story in hindi ...उड़ान

                 Story in hindi ...उड़ान

     
   
   
      सर्दी का सुहाना मौसम है ठण्डी ठण्डी हवा चल रही है। जैसे ही हवा तन को छूती है तो एक अलग प्रकार का अहसास होता है। ऐसे मौसम मैं रवि अपने दादाजी के साथ घर के बहार निकला आज वह बहुत खुश है और हो भी क्यों न कल दादाजी उसके लिए एक नई पतंग लेकर जो आये थे। आज वही पतंग लेकर दादाजी के साथ उड़ाने जा रहा था। वह बहुत उत्साहित था बार बार दादाजी को कहता " आज सभी से ऊँची मेरी पतंग ही उड़ेगी आज मैं अपने सभी दोस्तों की पतंगों को काट दूँगा।" दादाजी बस मुस्कुरा देते ।


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          कुछ ही देर में रवि अपने दादाजी के साथ अपने गाँव के मैदान पर पहुँच गया। वहाँ रवि ने देखा कि सबकी पतंगे आसमान में काफी ऊँचाई पर उड़ रही हैं। रवि ने भी जल्दी से अपनी पतंग में धागा बांधा और उड़ाने का प्रयास करने लगा पर पतंग कुछ ऊँचाई पर जाकर फिर जमीन पर बापस गिर गई।

        रवि ने दूसरी बार फिर पतंग को उड़ाने की कोशिश की पर नतीजा वैसा ही रहा पतंग फिर से जमीन पर गिर गई। 
अब रवि ने पतंग को उठाया और उसे ऐसे देखने लगा जैसे मरीज को डॉक्टर देखता है। फिर उसने पतंग को थोड़ा हाँथो से मोड़ा और फिर से पतंग को उड़ाने का प्रयास करने लगा। रवि को ऐसा करते हुए दादाजी गौर से देख रहे थे।जैसे दादाजी देखना चाह रहे हो की रवि कितनी कोशिश कर सकता है पतंग को उड़ाने के लिये। खैर इस बार भी रवि fail हो गया और पतंग पुनः जमीन पर आ गई।
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       अब रवि बहुत ही निराश हो गया और उसे लगने लगा की पतंग में ही कोई खराबी है जिसके कारण वो उड़ नही रही है। वह सीधा अपने दादाजी के पास पहुँचा और बोला दादाजी अपने मेरे लिए ख़राब पतंग लायी है आपको अच्छी पतंग लेना नही आता देखो यहाँ पर सभी की पतंगे अच्छी उड़ रही हैं। सिर्फ मेरी ही नही उड़ रही क्योंकि ये पतंग ही ख़राब है।story in hindi.

       दादाजी रवि की बातें सुन कर हँसने लगे और बोले बताओ मैं अभी इसे सही कर देता हूँ। दादाजी ने रवि से पतंग ले ली और खड़े हो गये जैसे किसी चीज का इंतजार कर रहे हो। रवि ने दादाजी से पूछा आप पतंग को लेकर यूँ ही क्यों खड़े हो इसे उड़ा क्यों नही रहे । दादाजी ने इशारे से रवि को शांत रहने के लिए कहा । कुछ देर बाद दादाजी ने पतंग को उड़ाया तो वह उड़ने लगी और देखते ही देखते काफी ऊँचाई पर पहुँच गयी जैसी बाकि सब पतंगों को बता रही हो कि यहाँ की queen पतंग वो ही है।

       रवि ने आश्चर्य करते हुए दादाजी से पूछा कि " दादाजी ये आपने कैसे इतनी आसानी से कर लिया और मैं इतनी मेहनत करने के बाद भी नही कर पाया।"

       दादाजी ने बहुत सुंदर  जबाव दिया " बेटा मैंने तेज हवा चलने का इंतजार किया और जैसे ही हवा चली मैंने पतंग उड़ा दी। बेटा जीवन में भी हम सफलता प्राप्त करने का प्रयास करते है और जब असफल हो जाते हैं तो जैसे तुमनें पतंग को दोष दिया वैसे ही लोग अपनी किस्मत को दोष देते है। पर कोई उस हवा का  इन्तजार नही करना चाहता जो उसे भरवायेगी उड़ान।" writer @ गौरव राजपुत


Moral of story :-  सही समय पर सही प्रयास करना ही सफलता का मूल मंत्र है।

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