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Story in hindi

                       Story in hindi


राम बाबू थोड़े परेशान लग रहे थे। वो ट्रैन के जिस डिब्बे में बैठ थे । उसमे बैठ सभी लोग उन्हें चोर जैसे ही प्रतीत हो रहे थे । अभी सामने जो सज्जन बैठे हैं उनकी बड़ी हुई दाड़ी सुर्ख लाल आँखे और उनके कपड़ो से आ रही अजीब सी गंध राम बाबू को बैचेन कर रही थी। वो अपने पास रखे बैग को उठा कर अपनी गोद में रख लेते हैं। रात के 12 बज रहे थे नींद बार बार आँखों को बंद करने पर मजबूर कर देती पर डर के उन आँखों को फिर खोलने पर मजबूर कर देता। ट्रैन अबाध गति से ट्रैक पर दौड़े जा रही है।

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         अचानक ट्रैन की गति कम हुई और रुक गई रामबाबू ने खिड़की को खोलकर देखा तक पता चला की रेलवे स्टेशन है यहाँ ट्रैन कुछ देर रुकेगी। रामबाबू ने पानी की bottel निकाली कुछ पानी पिया और कुछ को अपने मुँह पर मारा ताकि नींद को भगाया जा सकें। इससे भी कोई फायदा नजर आते न दिखा तो पास में चाय बेचने वाले को बुलाया और एक चाय के लिए बोला पास में बैठे वाले उस सज्जन व्यक्ति ने भी रामबाबू को बोला " भाई साहब मेरे लिए भी एक चाय ले लीजिए।" रामबाबू ने तीक्ष्ण नजरों से उस व्यक्ति को देखा फिर चाय वाले को दो चाय देने के लिए कहा। उस व्यक्ति ने चाय की चुस्की लेते हुए रामबाबू से पूछा " भाई साहब आप कहाँ जा रहे हो"  रामबाबू ने उपेक्षा करते हुए कोई जबाब नही दिया और चाय की चुस्की लेते रहे। उस व्यक्ति ने फिर बोलना शुरू किया " साहब मैं दिल्ली जा रहा हूँ मैं वहीं रहता हूँ वहाँ मेरा एक छोटा सा मकान है बीवी और 3 बच्चे हैं।"  अभी भी रामबाबू ने कोई जबाब नही दिया और चाय की चुस्की लेते रहे। उस व्यक्ति ने फिर बोलना शुरू किया " साहब आपको बहुत नींद आ रही ऐसा लगता है ।'
              

      रामबाबू ने इस बार गुस्से में जबाब दिया " तुम अपने काम से काम रखो और हाँ मुझे कोई नींद नही आ रही है ।" ऐसा सुनकर उस व्यक्ति ने कुछ गंभीर चेहरा बना लिया जैसे उसे इस बात का काफी बुरा लगा हो फिर वह चुपचाप अपने रुमाल को अपने चेहरे पर डाल कर सो गया। रामबाबू को डर लग रहा था उस व्यक्ति का और लगे भी क्यों न उनके बैग में दस लाख रुपए जो थे। पर रात के 3 बज चुके थे ठंडी हवाओं में जैसे कोई नशा था रामबाबू ने न चाहते हुए आँखों को बंद कर लिया और जब नींद खुली तो हड़बड़ा कर उठे दिल्ली स्टेशन आ चुका था। उन्होंने नीचे गिरा हुआ अपना बैग उठाया और जल्दी से ट्रेन से उतर गए।

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           स्टेशन से निकल कर रामबाबू ने जल्दी से ऑटो रिक्शा पकड़ा और उसमें बैठकर जैसे ही निकले पीछे से आवाज आई " साहब रुकिए रुकिये" रामबाबू ने  पीछे मुड़कर देखा तो वही ट्रैन वाला व्यक्ति उ आवाज दे रहा था । रामबाबू को बहुत गुस्सा आया उन्होंने ऑटो वाले को रुकने के लिए कहा और जैसे ही वह व्यक्ति पास आया तो रामबाबू गुस्से से उस पर चिल्लाकर बोले "  तुमने मुझे रत भर परेशान किया और अभी भी कर रहे हो मुझे तो तुम चोर बदमाश लग रहे हो यदि और परेशान किया तो पुलिस को बुलाकर जेल के अंदर करवा दूँगा।" उस व्यक्ति ने कहा " साहब आप जल्दबाजी में आपके बैग को छोड़कर मेरा बैग ले आये थे ये लीजिये आपका बैग।" ऐसा कहकर उस व्यक्ति ने रामबाबू को उनका बैग दिया और अपना बैग लिया और चुपचाप वहाँ से चल दिया बिना रामबाबू का जबाव सुने।उसको जाते देख रामबाबू को अपने आप पर गुस्सा आ रही थी और आँखों से आँशु निकल रहे थे जो उस व्यक्ति का आभार व्यक्त कर रहे थे।
                                   Writer@gaurav rajput


Moral of story:- किसी व्यक्ति को देखकर ही उसके बारे में पूर्व धारणा नही बनाना चाहिए।


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