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jivan me lakshya ka mahatva

IMPORTANCE OF GOAL IN HINDIलक्ष्य का महत्व



jivan me lakshya ka mahatva बहुत अधिक होता  है। मान लीजिए आप एक रेलवे से स्टेशन पर खड़े हुए हैं। पर आपको मालूम नही है कि आपको कहाँ जाना है। तो सोचिये क्या होगा । ऐसी परिस्थिति में दो बातें हो सकती हैं पहली आप कहीं नही जाओगे railway station पर ही रहोगे दूसरी आप कहीं पर भी पहुँच जाओगे जो अपने पहले से तय नही किया। सम्भवतः ये दोनों ही स्थिति खराब हैं। इसलिए यदि हम सच में कोई सफलता हासिल करनी है या जीवन कुछ करना है । तो आप के पास एक स्पष्ट लक्ष्य होना अति आवश्यक है। जैसे रोटी बनाने के लिए आटा मुख्य आवश्यक वस्तु है । वैसे ही जीवन को निखारने और सवारने के लिए जीवन में एक स्पष्ट लक्ष्य हों जरुरी है।



Lakshya ka mahtv in hindi

          
"जीवन के रास्तों पर चलते हुए अपनी आँख अपने लक्ष्य पर टिकायें रखें। आम पर ध्यान दें गुठली पर नही।"


        ज्ञान आपको आपकी मंजिल तक निश्यचित ही पहुंचा देगा बशर्ते आपको अपनी मंजिल मालूम होनी चाहिए।





अपनी नजर लक्ष्य पर रखें


कुछ भी हो आपकी नजर हमेशा आपके लक्ष्य पर होनी चाहिए। यदि आप मुशीबतों पर ध्यान दोगे तो लक्ष्य नजर नही आयेगा और यदि आप लक्ष्य पर ध्यान दोगे तो मुसीबतें नजर नही आयेगी।

               1 जुलाई 1952 को फ्लोरेन्स चैडविक , कैटालिना चैनल ( catalina channel) पार करने वाली पहली महिला बनने वाली थी। English channel को वो पहले ही पार कर चुकी थी। सारी दुनिया की निगाहें उन पर टिकी थी। उन्होंने हड्डियों को कांपकपाने वाली ठंड और घने कोहरे में कई बार मछलियों को भी मात दी थी। वह किनारे पर पहुँचने का काफी प्रयास कर रही थी। पर वो जब भी दिखती चश्में में सिर्फ कोहरा ही दिखता । किनारा न दिखने के कारण फ्लोरेंस चैडविक ने हार मान ली। चैडविक को सदमा ये बात जानकर लगा कि वो किनारे से मात्र आधे मील ही दूर थीं। उन्होंने बाधाओं से घबरा कर हार नही मानी थी, उन्होंने हर इसलिए मानी कि उनको अपना लक्ष्य (किनारा) दिखाई देना बंद हो गया था। उन्होंने कहा भी " मैं बहाने नही बना रही हूँ। यदि मैंने किनारा देखा होता तो , मैं जरूर कामयाब हो जाती।"

          वो दो महीने बार फिर बापिस गईं । उन्होंने ख़राब मौसम के बाबजूद भी लक्ष्य पर ध्यान रखा और कैटलीना चैनल को पुरुषों का रिकॉर्ड 2 घंटे से तोड़कर पार कर लिया।

          दोस्तों यदि आपका ध्यान आपके लक्ष्य से थोड़ा भी विचलित हुआ तो आप सफलता से कोशों दूर हो जाओगे। अतः आपकी नजरें हमेशा लक्ष्य पर होनी चाहिए।




लक्ष्य क्यों जरूरी है?

Why are goals importance?




तेज धूप में भी मैग्निफाइंग ग्लास से कागज में आग जब तक नही लगती जब तक की मैग्निफाइंग ग्लास को कागज के ऊपर स्थिर (FOCUS)  न रखा जावें। focus की शक्ति से कागज आग पकड़ लेता है वैसे ही जीवन में आप जब ही किसी वस्तु पर focus कर पयोगे जब आपके पास एक निश्यचित लक्ष्य हो।

            
         एक बार एक यात्री सड़क पर रुका और उसने एक बुजुर्ग से पूछा कि " यह सड़क मुझे कहाँ ले जाएगी? बुजुर्ग ने पूछा " तुम्हें कहाँ जाना है ।" यात्री बोला " मुझे नही मालूम? 
तो बुजुर्ग ने मुसुकुरा कर कहा " कोई भी सड़क पकड़ लो क्या फर्क पड़ता है।"

         मान लीजिए कि आपकी फुटबाल टीम मैच खेलने के लिए तैयार है और अचानक goal post और goal लाइन को हटा दे । तब खेल का क्या होगा? आप स्कोर कैसे पता करेंगे ? आप कैसे जानोगे कि आप लक्ष्य तक पहुँच गये हैं? बिना दिशा के उत्साह उस जंगल की आग की तरह है जिससे मायूसी ही मिलती है । लक्ष्य ही होता है जो अहसास कराता है कि आप सही दिशा में जा रहा हैं।




सपने और लक्ष्य में अंतर
Diffirence between dreams and goal



अक्सर लोग सपने या इच्छा को लक्ष्य समझते हैं। सपने और इच्छाएं सिर्फ चाहत हैं। चाहतें  कमजोर होती है । निम्न बातें लक्ष्य को चाहतों से अलग करती हैं :-

  1. दिशा (direction)
  2. समर्पण ( Dedication)
  3. दृढ़निश्चय ( Determination)
  4. अनुशासन ( Discipline)
  5. समय सीमा (Deadline)

        सपने और लक्ष्य में इन पाँच D (  direction , dedication , determination , discipline , deadline) का अंतर होता है।



सपनों को हक़ीक़त कैसे बनायें


यदि आप अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहतें हैं तो निम्न कार्य करें :-

  1. एक कागज पर अपना स्पष्ट लक्ष्य लिखें ।
  2. लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कार्य योजना बनाएं।
  3. उपरोक्त बातों को रोज दो बार पढ़े।



ज्यादातर लोग अपना लक्ष्य क्यों नही बनाते?

Why don't more people set goals ?



आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ज्यादातर लोग अपना कोई लक्ष्य ही निर्धारित नही करते हैं। इसके निम्न कारण  हैं :-

  • निराशावादी नजरिया ( pessimistic) :- ज्यादातर लोगो का नजरिया निराशावादी होता है वो सम्भावनाओ के बारे में न सोचकर कठिनाइयों के बारे में सोचते है। इसलिए वो अपना कोई लक्ष्य निर्धारित नही कर पाते हैं।


  • अभिलाषा की कमी ( lack of ambition) :- यह जीवन मूल्यों के साथ साथ भरपूर जिंदगी जीने की इच्छा के आभाव का परिणाम होती है। हमारी सिमित सोच हमें आगे बढ़ने से रोकती है। एक मछुआरा था जो जब भी कोई बड़ी मछली पकड़ता उसे पानी में पुनः फेंक देता। ऐसी अजीब हरकत को देखकर किसी ने उससे पूछा कि वो ऐसा क्यों कर रहा है? तो मछुआरे ने जवाब दिया " मेरी कड़ाई छोटी है।" अधिकतर लोग जीवन में इसलिये सफलता प्राप्त नही कर पाते क्यों कि वो छोटी कड़ाई ले कर घुमते रहते हैं।


  • असफलता का डर ( fear of failure) :-  अधिकतर लोग असफलता से डरते है । वो सोचते हैं कि यदि में fail हो गया तो क्या होगा? लोग क्या सोचेंगे मेरे बारे में? लोग क्या कहेंगे ? उनके अवचेतन मन में ये चलता रहता है कि यदि लक्ष्य ही निर्धारित नही करेंगे तो असफल भी नही होंगे। पर वो लोग ये नही समझते कि यदि उनके पास कोई लक्ष्य नही है तो वो वैसे भी असफल ही हैं।

  • टालमटोल  ( procrastination) :-  अभी तो काफी समय है आराम से कर लेंगे लक्ष्य का निर्धारण इस सोच के कारण भी लक्ष्य निर्धारण में बाधा आती है। यह सोच महत्वकांक्षा में कमी का नतीजा है।


  • सफलता का आतंक ( fear of success) :-  खुद को दूसरों से कम आँकना  या सफल जिंदगी को लेकर पाली गई आशंकाओं के कारण भी व्यक्ति में सफलता का आतंक पैदा हो जाता है।

  • स्वप्रेरणा की कमी ( lack of self motivation) :-  व्यक्ति के अंदर आंतरिक प्रेरणा के आभाव के करना भी वह कोई लक्ष्य निर्धारित नही करता है।

  • लक्ष्य का महत्व न समझना :- उन लोगो को किसी ने कभी लक्ष्य के बारे में सिखाया नही और उन्होंने कभी लक्ष्य का महत्व समझ नही।

  • लक्ष्य तय न करने का कोई तरीका न जानना ( lack of knowledge about goal setting) :-  लोग लक्ष्य तय करने का कोई तरीका नही जानते उन्हें हर कदम पर गाइड की जरुरत पड़ती है जो उन्हें बाधाओं को पार करने मे मदद कर सके।





अपना लक्ष्य कैसे निर्धारित करें ?

How to set your goal?





 लक्ष्य निर्धारित करने के लिए क्रमबद्ध कदम उठाने होते हैं जब आप किसी ट्रैन का टिकट खरीदते हैं तो उसमें क्या लिखा होता है ?



  • यात्रा करने का स्थान ( starting point)
  • कीमत ( price)
  • गन्तव्य स्थान ( destination point)
  • श्रेणी ( class of travel)
  • टिकिट समाप्ति तिथि ( ticket ending date)




अगर कोई आपसे आपकी जिंदगी के कोई बड़ा मकसद पूछे तो आप शायद कहेंगे कि आपको जिंदगी में सफल होना है , खुश रहना है , एक बेहतर जीवन व्यतीत करना है। आपका ये जवाब अस्पष्ट है ये आपकी चाहत है लक्ष्य नही । लक्ष्य SMART होना चाहिए । SMART का अर्थ है :-


  1. S फॉर Specific ( स्पष्ट) :- यदि आप कहते हैं कि ' मैं वजन घटाना चाहता हूँ।" ये अस्पष्ट है लक्ष्य नही हो सकता ये मात्र आपकी इच्छा है। यह लक्ष्य तब बनता है जब आप निश्यचित कर लेते हैं कि " मैं 100 दिन में 10kg वजन कम करूँगा।"
  2. M फॉर measurable ( मापे जाने योग्य) :- लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जिसे मापा जा सके। यदि लक्ष्य को मापा नही जा सकता तो लक्ष्य को हासिल भी नही किया जा सकता। यही वह रास्ता है जिससे अपनी तरक्की पर नजर रख सकते हैं।
  3. A फॉर Achievable ( हासिल किये जाने योग्य) :- इसका मतलब है कि लक्ष्य मुश्किल और कठिन तो हो पर वह नामुमकिन नही होना चाहिए क्योंकि असम्भव लक्ष्य निराश ही करता है।
  4. R फॉर Realistic ( वास्तविक) :-  लक्ष्य मात्र काल्पनिक नही होना चाहिए जैसे " मैं 30 दिन में 40 kg वजन कम करूँगा।"
  5. T फॉर Time bounded ( समयबद्ध) :- कार्य के सुरु और अंत की भी एक समय सीमा होना चाहिये।

      आपको अपना लक्ष्य निर्धारित कर समय उपरोक्त बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। सफलता के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य का होना बहुत जरुरी है बिना लक्ष्य के सफलता पाना वैसे ही है जैसे अँधेरे में तीर चलाना।



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