सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पोस्ट

जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

यहाँ वहाँ हर कहीं hindi story

यहाँ वहाँ हर कहीं hindi story

उस दिन शाम को पाँच बजे ही संजीव ऑफिस से वापस आ गया था। लिफ्ट से ऊपर जाकर उसने अपार्टमेंट की घंटी बजाई तो रोज की तरह दरवाजा नहीं खुला। वह बाहर खड़ा इंतजार करता रहा। फिर दूसरी और तीसरी बार भी बजाई तो दरवाजा वैसे ही बंद रहा। तब उसे लगा कि उसके पापा कहीं चले गए हैं। यदि वे भीतर होते तो फौरन दरवाजा खोलते। लेकिन उन्हें मालूम भी तो नहीं था कि इस समय वह आ जाएगा, वर्ना वे बाहर नहीं जाते।
उसने अपने पिता रवींद्र बाबू को कॉल किया, "हलो पापा, कहाँ हैं आप?'' रवींद्र बाबू नुक्कड़ वाली स्नैक्स की दुकान में खड़े समोसे खा रहे थे। उन्होंने सोचा कि संजीव ऑफिस से फोन कर रहा है। इसलिए इत्मीनान से बोले, "संजीव? कहो किसलिए फोन किया?''
यदि वे जानते कि संजीव बाहर खड़ा है तो इस तरह शांति से बात न करते। उनकी आवाज में घबराहट घुली होती... घर पहुँचने के लिए बेताब हो जाते।
संजीव ने कहा, "आप कहाँ हैं?''
"मैं इस गली की स्नैक्स वाली दुकान में समोसे खा रहा हूँ। मैं तुम दोनों के लिए भी लेता आऊँगा।'' उनकी आवाज में वही शांति बरकरार थी।
संजीव ने कहा, &q…

अपरिचित hindi story

अपरिचित hindi storyअपरिचित मोहन राकेश जी के एक उत्तम रचना है। मोहन राकेश हिंदी साहित्य के एक जानेमाने साहित्यकार है। इनका जन्म 8 जनवरी 1925 को अमृतसर पंजाब में हुआ। मोहन राकेश जी का निधन 3 जनवरी 1972 को दिल्ली में हुआ। आपने उपन्यास , कहानी , नाटक, निबंध आदि की रचना की।आज हम मोहन राकेश जी की कहानी अपरिचित आपके साथ शेयर कर रहे हैं। यह कहानी आपके दिल को छू ले गी ऐसा हमारा विश्वास है
अपरिचित हिंदी स्टोरी

कोहरे की वजह से खिड़कियों के शीशे धुँधले पड़ गये थे। गाड़ी चालीस की रफ़्तार से सुनसान अँधेरे को चीरती चली जा रही थी। खिड़की से सिर सटाकर भी बाहर कुछ दिखाई नहीं देता था। फिर भी मैं देखने की कोशिश कर रहा था। कभी किसी पेड़ की हल्की-गहरी रेखा ही गुज़रती नज़र आ जाती तो कुछ देख लेने का सन्तोष होता। मन को उलझाए रखने के लिए इतना ही काफ़ी था। आँखों में ज़रा नींद नहीं थी। गाड़ी को जाने कितनी देर बाद कहीं जाकर रुकना था। जब और कुछ दिखाई न देता, तो अपना प्रतिबिम्ब तो कम से कम देखा ही जा सकता था। अपने प्रतिबिम्ब के अलावा और भी कई प्रतिबिम्ब थे। ऊपर की बर्थ पर सोये व्यक्ति का प्रतिबिम्ब अजब बेबसी के साथ ह…

Good morning quotes in hindi

Good morning quotes in hindi
Good morning quotes in hindi जो आपकी और आपके दोस्तों की सुबह को खुशनुमा बनाएंगे और आप दिन भर तरोताजा महसूस करेंगे। कुछ बेहतरीन good morning quotes :-


Quote 1 - "यदि आप असफल होते हैं तो आप निराश हो सकते हैं, लेकिन यदि आप कोशिश नहीं करते हैं तो आप बर्बाद हो जाते हैं।" good morning!
Quote 2 - "सूर्य हमें रोज स्मरण दिलाता है कि हम भी अंधेरे से फिर उठ सकते हैं, स्वयं के प्रकाश से प्रकाशित हो सकते हैं।" good morning!
Quote 4 - "जीवन वैसा ही बनता बनता है जैसा हम इसे बनाना चाहते है। सुखमय या दुखमय हमारी  इच्छा पर निर्भर करता है।"
Quote 5 - "इससे कोई फर्क नही पड़ता कि आप कितने धीमे चलते हैं फर्क इससे पड़ता कि आप कितने दूर तक चलते हैं।" शुभ प्रभात 🙏
Quote 6 - "उठो हर सुबह एक और नया अवसर लेकर आती है।" good morning!
Quote 7 - "जीवन की एक और नई सुबह के लिए ईश्वर का धन्यवाद करें।
Quote 8 -आज सुबह ये वादा करो अपने आप से की तब तक प्रयास करते रहोगे जब तक कि अपना लक्ष्य प्राप्त नही कर लेते।good morning!
Quote 9 -"अंत में इसस…

मुहब्बत a love story in hindi

मुहब्बत a love story in hindi
रविंद्र कालिया हिंदी साहित्य के एक जाने माने रचनाकार हैं। उनकी श्रेष्ट कहानी मुहब्बत आपके साथ शेयर कर रहे हैं । in hindi story हमारे ब्लॉग पर हिंदी साहित्य की सर्वश्रेष्ट कहानियों को हम प्रकाशित कर रहे हैं। ताकि हिंदी साहित्य के प्रति लोगो का रुझान बढ़ें और सभी हिंदी साहित्य की श्रेष्ट रचनाओं से रूबरू हो सकें।

मुहब्बत a love story in hindi


कपिल चाय की चुस्कियाँ लेते हुए अखबार पढ़ रहा था, तभी गोपाल ने सूचना दी कि दो महिलाएँ मिलने आई हैं। कपिल टॉयलेट से फारिग हो कर ही किसी आगन्तुक से मिलना पसंद करता है। उसने खिन्न होते हुए कहा, 'इतनी सुबह? मुवक्किल होंगी। दफ्तर में श्रीवास्तव होगा, उससे मिलवा दो।'
'वे तो आपसे ही मिलना चाहती हैं। शायद कहीं बाहर से आयी हैं।'
'अच्छा! ड्राईंगरूम में बैठाओ, अभी आता हूँ।'
कपिल टॉयलेट में घुस गया। इत्मीनान से हाथ मुँह धो कर जब वह नीचे आया तो उसने देखा, सोफे पर बैठी दोनों महिलाएँ चाय पी रही थीं। एक सत्तर के आसपास होगी और दूसरी पचास के। एक का कोई बाल काला नहीं था और दूसरी का कोई बाल सफेद नहीं था, मगर दोनों चश्मा पहन…

Nai roshani ravindranath tagore story in hindi

Nai roshani ravindranath tagore story in hindi


  Contents 
1.1 Ravindranath tagore ka jivan parichay1.2 Ravindranath tagore story nai roshani                                         
Ravindranath tagore ka jivan parichay


रविंद्रनाथ टैगोर मूलतः बांग्ला भाषा के साहित्यकार हैं। रविंद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ। आपने उपन्यास, कहानी, नाटक, कविता, संस्मरण आदि विधाओं की रचना की 1913 में गीतांजलि रचना के लिए रवींद्रनाथ टैगोर को नाबेल पुरुष्कार से सम्मानित किया किया गया। रवींद्रनाथ टैगोर को नाबेल प्राप्त करने वाले पहले भारतीय होने का गौरव प्राप्त हुआ। लोग उन्हें प्यार से गुरुदेव के नाम से पुकारते थे। रविंद्रनाथ का निधन 7 अगस्त 1942 को हुआ। रविंद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कहानी नई रोशनी यहां पर शेयर कर रहे हैं।

Nai roshani ravindranath tagore story in hindi







बाबू अनाथ बन्धु बी.ए. में पढ़ते थे। परन्तु कई वर्षों से निरन्तर फेल हो रहे थे। उनके सम्बन्धियों का विचार था कि वह इस वर्ष अवश्य उत्तीर्ण हो जाएंगे, पर इस वर्ष उन्होंने परीक्षा देना ही उचित न समझा।
इसी वर्ष बाबू अनाथ बन्धु का विवाह…

Rahim ke dohe

Rahim ke dohe
 Contents                            
1.1 rahim ka jivan prichay1.2 rahim ke prasiddh dohe



रहीम हिंदी काव्य एक प्रसिद्ध कवि हैं। उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से जनजाग्रति का कार्य किया। रहीम का पूरा नाम अब्दुल रहीम खाने खानाँ था। मुस्लिम होते हुए भी उन्होंने हिन्दू धर्म को भी अन्तर्मन की गहराई से स्वीकारा था इसकी झलक उनके साहित्य में देखने को मिलती है। उन्होंने अपने कई दोहों में हिन्दू देवी देवताओं का उदाहरण प्रस्तुत किया है। रहीम जी हिन्दू मुस्लिम भाई चारे की एक कड़ी थे। उनके दोहों में असामान्य ज्ञान और गहरे व्यवहारिक अनुभव का सुंदर संगम देखने को मिलता है। आज हम रहीम के प्रसिद्ध दोहे आपके साथ शेयर कर रहे हैं।

रहीम के प्रसिद्ध दोहे
Rahim ke prasidh dohe
1.
चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह। जिनको कछू न चाहिये, वे साहन के साह।। 1
2. छिमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात। का रहिमन हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात।।2
3. जे गरीब पर हित करें, ते रहीम बढ़ लोग। कहाँ सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग।।3
4. जैसी जाकी बुद्धि है, तैसी कहै बनाय। ताको बुरा न मानिये, लेन कहाँ सो जाय।।4
5. जो बड़ेन को लघु कहें, नहीं …