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Kisan a motivational story in hindi/ किसान ए मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी

 Kisan a motivational story in hindi/ किसान ए मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी


रामू एक गरीब किसान का बेटा था। उसके परिवार में उसकी एक छोटी बहन , माँ और पिता थे। रामू के पिता ने रामू को कभी भी गरबी का अहसास नही होने दिया। जो कोपड़े , खिलौने , जूते रामू को पसन्द आते रामु के पिता उसको दिला देते । रामु की बहन को अपने परिवार को स्थिति को समझती थी । इसलिए वो हमेशा कम खर्चा करती और पढ़ने में ज्यादा से ज्यादा मेहनत करती ।
Hindi story


          रामू और उसकी बहन एक ही क्लास में पढ़ते थे। अब वो 10 वी कक्षा में आ गए थे। रामू की बहन ने मेहनत करना जारी रखा। वह रोज खानाँ बनाने और घर का काम करने में माँ की सहायता करती और उसके बाद पढ़ाई करती। तो वहीं रामू सारा समय अपने दोस्तों के साथ आवारा गर्दी करने में गुजार देता। 

           अब परीक्षा का समय  आ गया था। इसलिए रामू ने  भी पढ़ाई करने शुरू कर दिया । परीक्षा हुई और आखिर में रिजल्ट का दिन आ गया । 10 वीं की परीक्षा में रामू की बहन ने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। तो वहीं रामू fail हो गया था।

            रामु के घर के बाहर उसके बहन को बधाई देने के लिए गांव के आ जा रहे थे । रामू की बहन का साक्षात्कार लेने के लिए पत्रकार  भी आ जा रहे थे। रामू की बहन को सम्मानित करने के लिए आज क्षेत्र के विधायक जी भी आ रहे थे। रामू को आज बहुत दुख हो रहा था कि वो फ़ैल हो गया। उसको समझ नही आ रहा था कि उसकी बहन ने कैसे पुरे प्रदेश में top कर लिया। जबकि 9th में उसकी बहन के नंबर उससे बहुत कम थे।

              मंच सज चुका था गांव और क्षेत्र के सभी प्रतिष्ठित व्यक्ति और स्कूल स्टाफ और रामू के माँ और पिताजी वहां मौजूद थे। रामू भी एक सबसे last में सर झुकाए हुए बैठा था। जैसे कोई योद्धा युद्ध क्षेत्र से पीठ दिखाकर भाग कर बच गया हो और बाद में उसको आत्म ग्लानि हो। विधायकजी ने रामू की बहन को सम्मानित किया। और रामू की बहन से उसकी सफलता का राज सबको बताने के लिए बोला।

            रामू की बहन ने कहना शुरू किया कि " मेरी सफलता के पीछे मेरे पिताजी का हाथ है। मेरे पिताजी एक किसान हैं और हम बहुत गरीब हैं। मुझे घर की स्थिति पहले से ही पता थी। इसलिए मैं पढ़ना चाहती थी पर हर बार मेरा परीक्षा परिणाम कक्षा में सबसे कम रहता था। 9th का रिजल्ट भी कुछ वैसा ही था । मैं बहुत दुखी थी और मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं जीवन में कुछ नही कर सकती। तभी मेरे पिताजी ने मुझे ऐसे दुखी देखा तो मुझे से दुखी होने की पूरी बात पूछी । मैंने पिताजी को  सारी बात बताई और बोली की पिताजी मैं हर बार असफल हो जाती हूँ। मैं जीवन में कुछ नही कर सकती।

         पिताजी ने मेरी पूरी बात सुनी उसके बाद प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरा और कहा चलो मैं तुम को आज सफलता का राज बताता हूँ। पिताजी मुझे खेत पर ले गए और बोले बताओ यदि हम आज खेत में गेंहू बो देंगे तो क्या होगा? मैंने बोला पिताजी खेत साफ नही है यदि गेंहू बो भी देंगे तो नही होगा।

     पिताजी मुस्कुराये और बोले ठीक है । यदि खेत साफ कर के बो दें गेंहू तो ? मैंने बोला पिताजी खेत साफ कर के भी गेंहू वो देने पर वो नही होगा। उसमे पानी देना पड़ेगा मेहनत कर उसे पकाना पड़ेगा और उसके बाद उसे काट कर निकलना पड़ेगा।

     पिताजी मेरी बात सुनकर मुस्कुराये और बोले बेटा ऐसे ही पढ़ाई में भी है पहले खेत को साफ करने के जैसे अपने दिमाग को साफ करो। उसके बाद जैसे हम खेत में बीज डालते है वैसे ही तुम पढ़ाई करो। और जैसे हम समय समय पर पानी देते है वैसे ही तुम समय समय पर अपनी पढ़ी हुए चींजों को पुनः पढ़ते रहें। जैसे हम किसानों को सर्दी , गर्मी सभी को सह कर कठोर मेहनत लगातार करनी होती है । वैसे ही तुम को भी कठोर मेहनत करनी पड़ेगी।

     उस दिन मुझे सफल होने का राज पता चला । और जैसा जैसा पिताजी ने बताया था वैसा ही मैंने किया और आज मैंने प्रदेश में 10 वी में प्रथम स्थान प्राप्त किया। अंत मैं अपने साथी दोस्तों से इतना ही कहना चाहती हूँ कि

     " एक दिन में सफलता नही मिलती , पर एक दिन सफलता जरूर मिलती है बस उस दिन तक मेहनत करते रहना।"

    ये कहकर रामू की बहन ने अपनी बात खत्म कि चारो और तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी रामू के माता पिता की आँखों से आंसू वर्ष रहे थे और रामू के उदास चेहरे पर एक मुस्कुराहट छा गयी थी क्योंकि आज उसे अपनी बहन की सफलता का राज जो पता चल गया था।







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