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तेरे नाम का भी शोर होगा हिंदी कविता

 रुक न तु , थक न तु  तेरे नाम का भी शोर होगा। तुझ को भी मिलेगी मंजिल , तेरा भी एक दौर होगा।। अपनी हार से स्वयं को यूँ ही न हताश कर , फिर हो जा उठ खड़ा फिर युद्ध का आगाज कर। जीत हार की छोड़  परवाह , स्वयं पर तु विश्वास कर , चीर निराशाओं के घोर अंधेरे , उम्मीदों का भोर होगा। रुक न तु , थक न तु  तेरे नाम का भी शोर होगा। तुझ को भी मिलेगी मंजिल , तेरा भी एक दौर होगा।। युद्ध ही तेरा धर्म है , लड़ना ही तेरा कर्म है इस जीवन युद्ध मे न कभी तेरी हार होगी या सीख होगी या जीत होगी । त्याग अपने डर को तुझे लड़ना होगा , कभी गिरना होगा तो कभी उठना होगा।। चीर निराशाओं के घोर अंधेरे , उम्मीदों का भोर होगा। रुक न तु , थक न तु  तेरे नाम का भी शोर होगा। तुझ को भी मिलेगी मंजिल , तेरा भी एक दौर होगा।।
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101 hindi best quotes status

Nice line - गरीब मीलों चलता है भोजन पाने के लिए, अमीर मीलों चलता है,  उसे पचाने के लिए, किसी के पास खाने के लिए एक वक्त की रोटी नहीं, किसी के पास एक रोटी खाने के लिए वक्त नहीं। कोई अपनो के लिए, अपनी रोटी छोड़ देता है। कोई रोटी के लिए अपनो को छोड़ देता है दौलत के लिए सेहत खो देता है सेहत पाने के लिए  दौलत खो देता है। जीता ऐसे है जैसे कभी मरेगा नहीं, और मर ऐसे जाता है जैसे कभी जीया ही नहीं। एक मिनट में ज़िन्दगी नहीं बदलती एक मिनट में लिया गया फैसला, जिन्दगी बदल देता है 1.  स्वयं को कभी कमजोर साबित मत होने दें क्योंकि.. डूबते सूरज को देखकर लोग - घरों के दरवाजे बंद करने लगते हैं ! 2. मुझे जिंदगी का तजुर्बा तो नहीं पर इतना मालूम है, छोटा इंसान बडे मौके पर काम आ सकता है। 3. न तेरी शान कम होती, न रुतबा घटा होता .. जो गुस्से में कहा, वही हंस के कहा होता .. 4. हमारी हैसियत का अंदाजा ... तुम ये जान के लगा लो, हम कभी उनके नहीं होते जो हर किसी के हो जाएं ... 5. कुछ लोग खुद को शेर समझते है, मगर हम वो इन्सान है, जो शेरों को भी कुत्ते जैसा घुमाते है 6.बात उन्ही कि होती है जिनमे कोई बात  होती है। 7. श

प्रायश्चित

  अगर कबरी बिल्‍ली घर-भर में किसी से प्रेम करती थी, तो रामू की बहू से, और अगर रामू की बहू घर-भर में किसी से घृणा करती थी, तो कबरी बिल्‍ली से। रामू की बहू, दो महीने हुए मायके से प्रथम बार ससुराल आई थी, पति की प्‍यारी और सास की दुलारी, चौदह वर्ष की बालिका। भंडार-घर की चाभी उसकी करधनी में लटकने लगी, नौकरों पर उसका हुक्‍म चलने लगा, और रामू की बहू घर में सब कुछ। सासजी ने माला ली और पूजा-पाठ में मन लगाया। लेकिन ठहरी चौदह वर्ष की बालिका, कभी भंडार-घर खुला है, तो कभी भंडार-घर में बैठे-बैठे सो गई। कबरी बिल्‍ली को मौका मिला, घी-दूध पर अब वह जुट गई। रामू की बहू की जान आफत में और कबरी बिल्‍ली के छक्‍के पंजे। रामू की बहू हाँडी में घी रखते-रखते ऊँघ गई और बचा हुआ घी कबरी के पेट में। रामू की बहू दूध ढककर मिसरानी को जिंस देने गई और दूध नदारद। अगर बात यहीं तक रह जाती, तो भी बुरा न था, कबरी रामू की बहू से कुछ ऐसा परच गई थी कि रामू की बहू के लिए खाना-पीना दुश्‍वार। रामू की बहू के कमरे में रबड़ी से भरी कटोरी पहुँची और रामू जब आए तब तक कटोरी साफ चटी हुई। बाजार से बालाई आई और जब तक रामू की बहू ने पान लगाया ब

हरिवंश राय प्रसिद्घ कविता जो बीत गयी सो बात गई

जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अंबर के आंगन को देखो कितने इसके तारे टूटे कितने इसके प्यारे छूटे जो छूट गए फिर कहाँ मिले पर बोलो टूटे तारों पर कब अंबर शोक मनाता है जो बीत गई सो बात गई जीवन में वह था एक कुसुम थे उस पर नित्य निछावर तुम वह सूख गया तो सूख गया मधुबन की छाती को देखो सूखीं कितनी इसकी कलियाँ मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ जो मुरझाईं फिर कहाँ खिली पर बोलो सूखे फूलों पर कब मधुबन शोर मचाता है जो बीत गई सो बात गई जीवन में मधु का प्याला था तुमने तन मन दे डाला था वह टूट गया तो टूट गया मदिरालय का आँगन देखो कितने प्याले हिल जाते हैं गिर मिट्टी में मिल जाते हैं जो गिरते हैं कब उठते हैं पर बोलो टूटे प्यालों पर कब मदिरालय पछताता है जो बीत गई सो बात गई मृदु मिट्टी के बने हुए मधु घट फूटा ही करते हैं लघु जीवन ले कर आए हैं प्याले टूटा ही करते हैं फ़िर भी मदिरालय के अन्दर मधु के घट हैं, मधु प्याले हैं जो मादकता के मारे हैं वे मधु लूटा ही करते हैं वह कच्चा पीने वाला है जिसकी ममता घट प्यालों पर जो सच्चे मधु से जला हुआ कब रोता है चिल्लाता है जो बीत गई सो बात गई

Prushkar moral story in hindi for students

एक बार एक राजा अपने राज्य के भ्रमण पर निकला । उसने राज्य की गली गली घूमा  व्यापारियों को व्यापार करते देखा माँ को अपने बच्चों को सँभालते हुए देखा किसानों को खेत में कड़ी मेहनत करते हुए देखा सभी खुशहाल नज़र आ रहे थे।        ये सब देखकर राजा कुछ गंभीर मुद्रा में सोचने लगा फिर हल्का सा मुस्कुराया जिससे प्रतीत हुआ कि राजा ने कुछ खास योजना बनायी है। फिर राजा ने अपने सैनिकों को कुछ समझाया और कहा  कि आज रात को इस सड़क के बीचों बीच एक भारी पत्थर रख दें।        अगली सुबह राजा ने फिर उसी जगह पर आ कर देखा की जैसा उसने अपने सैनिकों को कहा था उसी के अनुसार कार्य किया गया है। अब राजा छुपकर अपनी प्रजा की प्रतिक्रिया देखने लगा।      कुछ देर में चार लोग उस रास्ते पर आते हुए दिखे जैसे ही उन लोगो ने सड़क की बीच पत्थर देखो तो चारो राज को कोस ने लगे की हमारा राजा हमारे लिए कुछ नही करता सड़क पर बन्द है पर राजा ने अभी तक सड़क पर से इस बड़े पत्थर को नही हटवाया। ऐसी बातें करके वो चले गए। राजा चुपचाप छिपकर उनकी बातें सुनता रहा।         इसी प्रकार जो भी बन्दा वहाँ से निकलता राजा को ही कोसता। ऐसा होते होते शाम हो गयी रा

विलासी कहानी - शरतचंद चटोपाध्याय

  पक्का दो कोस रास्ता पैदल चलकर स्कूल में पढ़ने जाया करता हूँ। मैं अकेला नहीं हूँ, दस-बारह जने हैं। जिनके घर देहात में हैं, उनके लड़कों को अस्सी प्रतिशत इसी प्रकार विद्या-लाभ करना पड़ता है। अत: लाभ के अंकों में अन्त तक बिल्कुल शून्य न पड़ने पर भी जो पड़ता है, उसका हिसाब लगाने के लिए इन कुछेक बातों पर विचार कर लेना काफी होगा कि जिन लड़कों को सबेरे आठ बजे के भीतर ही बाहर निकल कर आने-जाने में चार कोस का रास्ता तय करना पड़ता है, चार कोस के माने आठ मील नहीं, उससे भी बहुत अधिक। बरसात के दिनों में सिर पर बादलों का पानी और पाँवों के नीचे घुटनों तक कीचड़ के बदले धूप के समुद्र में तैरते हुए स्कूल और घर आना-जाना पड़ता है, उन अभागे बालकों को माँ-सरस्वती प्रसन्न होकर वर दें कि उनके कष्टों को देखकर वे कहीं अपना मुँह दिखाने की बात भी नहीं सोच पातीं। तदुपरान्त यह कृतविद्य बालकों का दल बड़ा होकर एक दिन गांव में ही बैठे या भूख की आग बुझाने के लिए कहीं अन्यत्र चला जाय, उनके चार कोस तक पैदल आने जाने की विद्या का तेज आत्म-प्रकाश करेगा-ही-करेगा। कोई-कोई को कहते सुना है, 'अच्छा, जिन्हें भूख की आग है, उनक

अपरिचिता कहानी - रविंद्रनाथ टैगोर

हम आपके लिए रविंद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कहानी अपरिचिता ले कर आये हैं। उम्मीद है कि ये story आपको पसंद आएगी। आज मेरी आयु केवल सत्ताईस साल की है। यह जीवन न दीर्घता के हिसाब से बड़ा है, न गुण के हिसाब से। तो भी इसका एक विशेष मूल्य है। यह उस फूल के समान है जिसके वक्ष पर भ्रमर आ बैठा हो और उसी पदक्षेप के इतिहास ने उसके जीवन के फल में गुठली का-सा रूप धारण कर लिया हो। वह इतिहास आकार में छोटा है, उसे छोटा करके ही लिखूंगा। जो छोटे को साधारण समझने की भूल नहीं करेंगे वे इसका रस समझेंगे। कॉलेज में पास करने के लिए जितनी परीक्षाएं थीं सब मैंने खत्म कर ली हैं। बचपन में मेरे सुंदर चेहरे को लेकर पंडितजी को सेमल के फूल तथा माकाल फल (बाहर से देखने में सुंदर तथा भीतर से दुर्गंधयुक्त और अखाद्य गुदे वाला एक फल) के साथ मेरी तुलना करके हंसी उड़ाने का मौका मिला था। तब मुझे इससे बड़ी लज्जा लगती थी; किंतु बड़े होने पर सोचता रहा हूं कि यदि पुनर्जन्म हो तो मेरे मुख पर सुरूप और पंडितजी के मुख पर विद्रूप इसी प्रकार प्रकट हो। एक दिन था जब मेरे पिता गरीब थे। वकालत करके उन्होंने बहुत-सा रुपया कमाया, भोग करने का उन्हें